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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

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४०२ सिद्धान्त दर्पण
एकः पश्चाद् भ्रमो भानां नाक्षत्रं दिन मुच्यते :
घटिकादिक मायुश्च तन्मानेनैव सिद्ध्यति । ३५ ।
नक्षत्रों के पश्चिम दिशा में एक चक्र पूरा करने में जितना समय लगता है,
उसे १ नक्षत्र दिन कहते हैं । घटी, पल आदि इसी मान के अनुसार होते हैं ।
ब्रह्मा की आयु भी इसी मान से होती है ।
नाक्षत्र मान संसिद्धं मायुः कल्पार्क वासरैः
गुणितं कल्प भदिन माप्तं सौराब्दादि स्फुटं । ३६ ।
नाक्षत्र मान की आयु को कल्प सौर दिन (१५,५२,००,००,०००,००) से गुणा
कर कल्प नक्षत्र दिन (१५,८२,२,३७,८,२,८,२८,००००) से भाग देने पर फल स्फुट
सौर वर्ष आदि होता है ।
यद्यपि स्याद् भग्रहाणां स्वस्वोदय युगान्तरम्
तत्तत् सावन घस्रारूय मुक्त पूर्वं तथापि हि । ३७ ।
पहले कहा जा चुका है, कि किसी ग्रह या नक्षत्र के एक उदय