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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 496, कुल 609 में से

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पृष्ठ 496

संवत्सरादि वर्णनम् ३९९
नित्यात् जन्यस्य कालस्य समुत्पत्ति र्भूदिति
श्रुति प्रमाण्य मासाद्य प्राह स्वायम्भुवो मनुः । १३ ।
इसी नित्य कालरूप परमेश्वर से जन्य काल भी उत्पन्न हुआ है- यह वेद
में कहा है तथा स्वायम्भुव मनु ने भी कहा है ।
तथाहि-कालः काल विभक्तिश्च नक्षत्राणि ग्रहस्तथा
सृष्टिं ससर्ज चैवेमां स्रष्टुमिच्छांन्निमाः प्रजा । इति । १४ ।
ईश्वर रूपी काल ने प्रजा की सृष्टि के लिए काल के विभाग (दिन, मास
आदि), नक्षत्र ग्रह तथा इस विश्व की रचना की ।
कालात्मा दिनकृत् प्रोक्ता होरास्कन्धे यतस्ततः
सिद्धान्त गदिता सृष्टिर्न विरोध मिहार्हति । १५ ।
˙ होरा स्कन्ध (बृहज्जातक मे)सूर्य को कालात्मा कहा गया है । इस उक्ति का
सिद्धान्त की उक्ति विरोध करती है, ऐसा मानना ठीक नहीं है।
त्रुट् यदि प्रलंयान्तेषु जन्यकालेषु वत्सरः
प्रधान भूतोऽवयवो खाङ्गैर्युक्तोऽयनादिभिः । १६ ।
सूर्य को कालात्मा मानने से वह स्वयं सृष्टि का कारण है । त्रुटि से लेकर
प्रलय तक के जन्य काल में वर्ष प्रधान अवयव है । इसके अवयव हैं-अयन,
सम्यग् वसन्ति यत्रर्तु मास पक्षादिनादयः
प्राज्ञैःकाल विशेषोऽसौ संवत्सर इतीरितः । १७ ।
मास पक्ष और दिन आदि । वर्ष रुपी अवयव इन्हीं से बना है, इसका एक
नाम संवत्सर भी है ।
अयने येन पूषर्तु त्रयेणोदग् दिशं तथा ।
दक्षिणां शा तदेवोक्त मयनं सौर मानजम् । १८ ।
सूर्य जिन तीन ऋतुओं (६ मास) में उत्तर दिशा और अन्य तीन ऋतुओं में
दक्षिण दिशा में जाता है उसे ही अयन कहते हैं । यह सूर्य की क्रान्ति के अनुसार
होता है । (अय् धातु का अर्थ गति है)
इयर्त्य शोक पुष्यादि लिङ्ग साधारणैतरम्
यः सकाल विशेषोऽत्रवसन्तादि ऋतुरुच्यते । १९ ।
जिस समय (दो मास) अशोक वृक्ष पुष्प आदि असाधारण चिह्न धारण करता
है । उस को आदि ऋतु वसन्त कहा जाता है ।
मास्यते परिमीयते येन चन्द्रार्द्ध संख्ययौ
सूर्य राशि गतिर्यत्र मास्यतेऽह्नोञ्च यत्रहिं । २० ।
जिस समय को मापा जाय या हिसाब किया जाय उसे मास कहते हैं । चन्द्र