सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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उसके नीचे (३) दूसरी लब्धि का घन-इन तीन संख्याओं के योग को भाज्य
से घटाने पर यदि बहुत कम शेष आता है । तो दूसरी लब्धि को एक कम कर
पुनः इसी प्रकार एक के नीचे एक तीन संख्यायें लिखते हैं ।
कृत्वा विधाय त्रिविधांक योगं स्थिरं विशुद्ध्यान्त मथांक पंक्तेः
तेनोज्झिताया पुनरन्य लब्धाः न्येवं फलां का घनमूल संज्ञा । २३८ ।
इस प्रकार तीन संख्यायें स्थिर होने पर उनका योग भाज्य से घटाते हैं और
शेष में अगले बिन्दु तक के अंक मिलाते हैं । अबतक के दो लब्धि अंको को
पहली लब्धि मानकर अगला लब्धि अंक पहले की तरह प्राप्त करते हैं और तीन
संख्याओं का योग घटाकर तब तक क्रिया करते हैं । जबकि अन्तिम बिन्दु तक
भाज्य के अंक समाप्त न हों । यही लब्धि घनमूल होता है ।
पतन्ति पंक्त्युर्ध्व रविन्दु तुल्या स्तेषां घनः पूर्ववदंक पंक्तिः ।
सा चेत्सहस्राल्पतयास्थिता स्यात् सकृद् भवेत्तद् घनमूलमेकम् । २३९ ।
घन अंक संख्या के ऊपर जितने बिन्दु होते हैं । घनमूल में उतने ही अंक
होते हैं । घन १००० से कम होने से उसका एक ही अंक का घनमूल होता है
तथा एक ही बार में निकलता है, बिना अन्य क्रियाओं के ।
भास्करपोष्यां घनकरण सूत्र वृत्तम्--
समत्रिघातश्च घनः प्रदिष्टः स्थाप्योधनोऽन्तस्य ततोऽन्त्यवर्गः
आदि त्रिनिघ्नस्तत आदि वर्गस्त्वन्त्या हताश्वादि घनश्च सर्वे । २४० ।
तीन समान अंक (संख्या) के गुणनफल को उस संख्या का घन कहा जाता
है । संख्या को रखकर उसके अन्तिम अंक के घन को रखेंगे । शेष अंक के वर्ग
को आदि अंक और तीन द्वारा गुणा कर और तब आदि संख्या के वर्ग को अन्त्यं
अंक और तब आदि अंक के घन को
स्थानान्तरत्वेन युतः घनः स्यात्प्रकल्प्यतत् खण्डयुगं ततोऽन्त्यम् ।
एवं मुहुर्वर्ग घन प्रसिद्धा वाद्यंकतो वा विधिरेष कार्यः । २४१ ।
एक-एक स्थान हटाकार रखेंगे । अन्त में सबको जोड़ देने पर पूरी संख्या
का घन आ जायेगा ।
संख्या को दो खण्डों में बांट कर भी अन्तिम खण्ड से इस प्रकार कार्य कर
बाकी खण्ड से भी कार्य करेंगे । इससे पूरी संख्या का घन आ जायेगा ।
खण्डाभ्यतां हतो राशिस्त्रिघ्नः खण्डघनै क्य युक्
वर्गमूल घनः स्वघ्नी वर्ग राशि घनोभवेत् । २४२ ।
संख्या के दो खण्डों को आपस में गुणा कर ३ से गुणा कर उससे संख्या
को गुणा करेंगे । उसके दाहिने अन्तिम संख्या का घन तथा बायें आदि संख्या
का घन जोड़ने से पूरी संख्या का घन आ जायेगा । किसी वर्ग संख्या का घन