सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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कालांशा ये निगदिता ग्रहाणा मुदयास्तजाः
तत्संग गृह्यतामत्र सौम्य क्रान्त्यन्तरं रवेः । १९६ ।
ग्रहों का जो उदय और अस्त कालांश कहा गया है, ग्रह और रवि का उत्तर
क्रान्ति का अन्तर उतना अंश रहने पर उनका उदय अस्त आरम्भ होगा ।
उदग् देशान्तरद्धिंः स्याद यथा व्यक्षात्तथापम
याम्येनातः प्रायशोऽस्मात् सौम्य शृंगोन्नतिर्विधो । १९७ ।
निरक्ष देश से उत्तर अक्षांश जैसे जैसे बढ़ेगा, क्रान्ति वृत्त दक्षिण में चन्द्र
दृङ् मण्डल से उतना ही नत रहेगा । इस कारण से चन्द्र की उत्तर शृंगोन्नति होती
है ।
रवीन्दु मार्गयोर्भूरिविप्रकर्षेऽपि तद् दृशोः ।
संगतः स्यान्महापाते क्रान्ति साम्यात् पुरोदितात् । १९८ ।
वैधृति और व्यतीपात को महापात कहा जाता है। सूर्य और चन्द्र की कक्षा
में बहुत अन्तर होने पर भी दोनों की क्रान्ति समान होने से इनकी किरणों के
मिलन के