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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 484

वासना शेष रहस्य वर्णन ३८७
सिद्धान्त शिरोमणौ-त्रिज्या वर्गादयन वलनज्या कृतिं प्रोज्झ्यमूलं
यष्टियष्ट्याद्युचर विशिखस्ताड़िता स्त्रिज्ययाभः
यद्वा राशित्रय युत खगद्युज्यकाघ्नस्त्रिमौर्व्या
भक्तस्पष्टो भवति नियतं क्रान्ति संस्कार योग्यः । इति । १९० ।
त्रिज्यावर्ग से अयन वलन ज्या का वर्ग घटाकर उसका वर्गमूल निकाले ।
इसको यष्टि कहा जाता है । ग्रह (चन्द्र) के शर को इस यष्टि से गुणा कर त्रिज्या
(३४३८) से भाग देने पर क्रान्ति संस्कार के लिये उपयोगी शर आता है । अथवा
ग्रह में ३ राशि (९०°) जोड़कर उसकी भुज ज्या निकालें । उसको पुनः शर से
गुणा कर त्रिज्या से भाग देने से भी क्रान्ति उपयोगी शर आता है ।
इतियद् भास्कर प्राहः सूक्ष्म बाणस्य तानवम्
युक्ति युक्तं न तद् तस्मात् विहितायन दृश् क्रियः । १९१ ।
इस श्लोक में भास्कराचार्य ने सूक्ष्म शर (स्फुट ध्रुव प्रोतवृत्तोय) का कम मान