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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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३८२ सिद्धान्त दर्पण
चन्द्र बिम्ब में भूछाया लग जाती है । इससे ज्ञात हुआ कि चंद्र और भू छाया
एक ही कक्षा (चन्द्र कक्षा) में हैं । अतः इसमें नत और लम्बन नहीं होता ।
सूर्य ग्रहे तु सूर्येन्दो र्भिन्न कक्षा निवासतः
देश भेदात् ग्रास भेदो लम्बनावनती तथा । १५६ ।
सूर्य ग्रहण में सूर्य छाया तथा चन्द्र छादक-दोनों किसी एक कक्षा (रवि चन्द्र
कक्षा) में नहीं रहने के कारण-अर्थात् अलग अलग कक्षाओं में रहने से पृथ्वी
पर स्थान भेद से ग्रास भी कम या अधिक होता है । इस एक ही कारण से लम्बन
और नति भी होता है ।
दृङ्मण्डल फल दृश्यं क्वाद्धोनं गोलपृष्ट गैः
ग्रहस्या यततो दृष्टि मण्डले सम्भवेन्नतिः । १५७ ।
पृथ्वी के गोलाकार सतह पर लोग किसी ग्रह को दृङ्मण्डल के आधे से
भूव्यासार्द्ध के बराबर कम क्षेत्र में देखते हैं । अतः दृङ्मण्डल में ग्रह का लम्बन
होता है ।
क्षिति जो पगते सूर्य दर्शान्ते भूमि गर्भतः
रवि बिम्बार्द्धगे सूत्रे बिम्ब मध्यं लगेद् विधोः । १५८ ।
अमान्त समय में सूर्य पृष्ठ क्षितिज पर आने से पृथ्वी के केन्द्र से सूर्य केन्द्र
तक की रेखा में चन्द्र भी रहता है । (सूर्य ग्रहण के समय) किन्तु
भू पृष्ठाद भानु बिम्बार्द्ध चुम्बि सूत्राद् विधुर्यतः
अधो विलम्बते तस्मात् क्षितिजेऽस्मिन् धरा नतिः । १५९ ।
किन्तु भूमि पृष्ठ से रवि बिम्ब केन्द्र तक की रेखा से चन्द्र लम्ब दिशा में रहने
के कारण और यह सबसे अधिक होने के कारण इसका परमनति या परम लम्बन
कहा जाता है ।
गर्भदृक् सूत्रयो रैक्यात् खमध्येन भवेदसौ
खस्वस्तिक क्षितिजोर्मध्ये सूत्रभेदान्नतिर्भवेत् । १६० ।
आकाश के मध्यस्थल अर्थात् खस्वस्तिक में ग्रह बिम्ब रहने पर पृथ्वी के
पृष्ठ से तथा केन्द्र से एक ही दृक् सूत्र होता है । उनमें अन्तर नहीं होने के कारण
नति नहीं होती है । ख स्वास्तिक तथा क्षितिज के बीच में किसी स्थान में पृष्ठ
से ग्रह की दिशा तथा केन्द्र से दिशा के बीच के अन्तर को नति या लम्बन कहते
हैं ।
खार्द्धे यदापवृत्तं स्यात्तदा तद् दृष्टि बिम्बयो
ऐक्यान्नावनतिः किन्तु लम्बनं परमं कुजे । १६१ ।
ख स्वस्तिक में रवि रहने से क्रान्ति वृत्त ही दृङ् मण्डल होगा अतः नति
नहीं होगी । केवल क्षितिज में परम लम्बन होगा ।