सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 472, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 472

: wait, is it रवीन्दोः or रवीन्द्वोः?
Look closely:
र (ra)
वी (vee)
न्दोः (ndoḥ) -> wait, is there a व subjoined to न्द?
In line 2: रवीन्द्वौ -> न्द्व has a distinct loop below.
In line 11: under न्द, there is NO व! It is just 'रवीन्दोः'!
Wait, let me look really closely at line 11:
र - वी - न्दोः. Yes, just न्द with o matra and visarga: रवीन्दोः.

Line 12:
अन्तरं यावदेतावद् भवतु स्फुटयो रवि । ११३ ।
Wait, is there visarga on रवि?
Look at "रवि": र - वि . There is no visarga. It is just "रवि । ११३ ।".

Line 13:
दोनों स्थानों (उच्च से ९०° तथा २७०° पर) पर प्रतिवृत्त सामान्य वक्र होने

Line 14:
के कारण भूकेन्द्र से मध्यम रवि या चन्द्र की दूरता स्पष्ट रवि या चन्द्र दूरता के

Line 15:
ही बराबर होगी ।

Line 16:
तत्रार्केन्द्वोर्मध्यकर्णौ (७६०८२९४।४८७०५)
Wait, let's look at the first word:
त - त्रा -