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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 468, कुल 609 में से

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पृष्ठ 468

कहते हैं । भगण के अनुपात से इष्ट सावन दिन का ग्रह निकालने की तुलना में
यह विधि सरल है ।
योक्ता परिधिनैर्मान्द्य शैघ्यः स्पष्टीकृतिः फलैः
भूगोल एव सातुल्या न तु लोकान्त रेष्वपि । ८४ ।
मन्दफल और शीघ्र फल संस्कार से ग्रहों को स्पष्ट करने की विधि पृथ्वी के
लोगों की दृष्टि से ही ठीक है । अन्य ग्रहों से देखने पर वैसी ग्रह स्थिति नहीं
होगी ।
अन्य खेटेषु लोकेषु दृक् सिद्धयै तत् प्रमाणतः
रवि कर्मानुसारेण सोन्नेयो फल वासना । ८५ ।
अन्य ग्रहों के लोगों को जिस स्थिति में ग्रह दिखाई देंगे उसे स्पष्ट करने के
लिए उस ग्रह की दूरी तथा अन्य ग्रहों का रवि कर्ण से साधन करना होगा ।
मन्दफल और शीघ्र फल करने का यही रहस्य है ।
सिद्धान्त शिरोमणौ-भूमेर्मध्ये खलु भवलयस्य मध्यं यतः स्याद्
यस्मिन् वृत्ते भ्रमति खचरो, नास्यं मध्यं कुमध्ये
भूस्थो द्रष्टा नहि भ वलये मध्य तुल्यं प्रपश्येत्
तस्मात्तज्ज्ञैः क्रियत इहतद्दोः फलं मध्यखेटे । इति । ८६ ।
नक्षत्र मण्डल के केन्द्र में भूगोल का केन्द्र है लेकिन वह ग्रह कक्षा का केन्द्र
नहीं है । अतः पृथ्वी की सतह से देखने पर अपने मध्य समान स्थिति में नहीं
दिखायी देगा । अतः ज्ञाता लोग मध्यम ग्रह का भुजफल (मन्द या शीघ्र) संस्कार
कर ग्रह स्पष्ट करते हैं ।
स्फुटीकृतः न भोगानां साक्षात्कर्तु समक्षितौ
साष्टादश कलाद्र्यर्था (५७।१८) स्थूल सूत्रेण शीतगोः । ८७ ।
ग्रहों को स्फुट करने के लिए तथा उनकी वास्तविक स्थिति देखने के लिए
समभूमि के एक अंश की अंगुल परिधि के हिसाब से (५७।१८) अंगुल व्यासार्द्ध
का चन्द्र का कक्षावृत्त बनायेंगे ।
कक्षावृत्तं लिखेदादौ भगणांशांगुलां गितम्
पूर्वोत्तरादि क्रमतो राशि चिह्नान्यजादितः । ८८ ।
कक्षा वृत्त का परिमाण ३६ अंगुल होगा । उसमें मेष आदि १२ राशियों को
पूर्व से उत्तर दिशा की तरफ क्रम से चिह्नित करेगा ।
ह्रस्वान्तद् व्यंगुल व्यासं भूगोल विलिखेद विधोः
मेषादिस्थं स्वमन्दोच्चं कल्पयित्वाल्पदूरगम् । ८९ ।
मध्य में २ अंगुल व्यास का भूगोल बनाय