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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 467, कुल 609 में से

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पृष्ठ 467

३७० सिद्धान्त दर्पण

  • एतद् भगण जेष्बिन्दु (१५) लिसोनेजस्य संम्प्रति
    दृक् साम्यात्पदकं लेखं ध्रुव गत्यादि संगतम् । ७७ ।
    इस भगण से जो मध्यम वृहस्पति आयेगा उससे १५ कला घटाने पर वह
    आकाश में प्रत्यक्ष होगा । इसमें ध्रुव गति आदि जोड़कर पदक आदि लिखना
    होगा ।
    भाविद् व्यब्दीश (११४२) वर्षान्ते मतद्वयज गीष्पतेः
    समत्वं भविता तत्र कार्ये दृक् सिद्धि रुत्तमैः । ७८ ।
    (११४२) वर्ष बाद उल्लिखित मत और पारम्परिक मत के अनुसार गुरु साधन
    कर देखेंगे कि दोनों मत से एक ही मान आता है, कि नहीं । उस समय सूक्ष्म
    बुद्धि वाले दृक् सिद्धि करेंगे ।
    शास्त्रस्यास्य विसंवादे धर्मगोप्ताच्युतेन चेत्
    सम्भव्यो ग्रन्थकृत्कश्चिद्रहस्य तत्कृतेह्लादः । ७९ ।
    ज्योतिष शास्त्र की गणना में त्रुटि होने पर धर्मरक्षक भगवान इस शास्त्र का
    संस्कारक उत्पन्न करते हैं । उसी को यह गोपनीय शास्त्र ज्ञात होता है । अन्य
    लोग यह रहस्य नहीं समझ सकते ।
    कलाद्या दशधा भुक्तिर्ग्रहाणां या पुरोदिता
    क्रमाद्दश गुणैकादिदिन संख्या हताथसा । ८० ।
    ‘ग्रहों की गति कला आदि १० भागों में पहले दी गयी है, इस दैनिक गति
    को क्रमशः १०,१० से गुणा कर दिन संख्या से गुणा करेगें ।
    अन्ततः क्रमषष्ठांशै र्विवरान्त समन्विता
    ततो द्व्र्यादि नन्दान्त गुणिता खरखादिभिः । ८१ ।
    फल को अंतिम स्थान (सबसे छोटे विभाग ) से ६० से भाग देकर शेष को
    वहीं रखेंगे, और भागफल को अगले विभाग की राशि में जोड़ेगे । यही क्रिया
    उस राशि और क्रमशः अगली राशियों में करेंगे । गुणनफल को पुनः २,३,---९
    संख्याओं से गुणा कर ६० से भाग देकर
    विपरादि गृहान्तानां स्वहारै र्विहृता क्रमात्
    फलयुक् शेष संस्थानैः सिद्धं यद् भादि पंचकम् । ८२ ।
    विपरा आदि स्थान में फलों को जोड़ेंगे । यह राशि आदि ५ स्थानों की
    संख्या होगी ।
    तत्कोष्ठकेषु संलेख्यं स संख्या पद काक्षया
    कर्मेद भगणैः खेटा नयनात्सुकरं मतम् । ८३ ।
    इसको कोष्ठक (Column) में लिखकर रखेंगे । इन्हीं संख्याओं को पदक