सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोलाधिकारे गोलादि वर्णनम् ३५७
धीरे धीरे चक्के को अहोरात्र में एक बार घुमायेगा ।
प्रातः पुरः स्थितिरवेः सविधे शलाकां
तिर्यग् ददत् क्षणघटी रूदिताः प्रमातुम्
अंकै र्घुरात्र्य वयवान् कलयेत्पुरेद्युः
प्राग् वन्नियो जयतु जीवन पूरणायैः । १०५ ।
सवेरे सूर्योदय के समय पूर्व क्षितिज में रवि चिह्न के निकट उसी चक्र से
तिरछे दक्षिणोत्तर दिशा में एक काठी रखेंगे । सूर्योदय से आरंभ कर चक्र के पूर्व
दिशा में घूमने से चक्र (नेमि) का जो चिह्न काठी से लगता है उससे अहोरात्र
का अवयव (घटी, पल आदि) जाना जा सकता है । अगले दिन भी उस चक्र
को उसी प्रकार स्थापित करेंगे ।
चक्रार्द्धतोऽवनितलावधि गोपनीयं
सर्वं भ्रमोपकरणं खलु दर्शकेभ्यः
तेषां भवेन्नहि चमत्कृतिरन्यथात्र
सच्छात्र नेत्रपतनार्ह मदो यदेव । १०६ ।
निचला चक्रार्द्ध जमीन के नीचे रखेंगे । जिससे यह दर्शकों को दिखायी
नहीं दे, नहीं तो दर्शकों की चमत्कार देखने की इच्छा नष्ट हो जायेगी । यह
गोपनीय विधि सिर्फ अच्छे छात्र को ही दिखानी चाहिये ।
अथ पुरोदित गोल परिभ्रमो भवति चक्र वदत्र मतान्तरम्
ब्रूत इह ध्रुव चक्र विलान्तगौ पृथुल दारु मयौ वलयौ क्रियात् । १०७ ।
पहले कहे गये गोल यन्त्र का भ्रमण भी इस स्वयंवह यन्त्र के समान होगा ।
इसके बारे में अन्य मत कहता हूँ । सायन मेषादि से ध्रुव (चक्र) मण्डल के भीतर
पतली लकड़ी का दो वृत्त बनायेंगे ।
विमलतैल मिलद् विल युग्मके समसुवृत्त शिखां ध्रुव यष्टिकाम्
अभिनिवेश्य पुनस्तन कीलकौ वलय पश्चिमगौनलकावधः । १०८ ।
ध्रुव चक्र के दोनों रन्ध्रो (काष्ठ के वृत्ताकार छेदो) में अच्छी तरह तेल देकर
समभाग से उसमें ध्रुव यष्टि को लगायेंगे) पुनः गोल के पश्चिम में दो छोटी कीलें
देकर कील के नीचे दो नली स्थापित करेंगे ।
तदनुसारि रसान्वित तुम्बिका युगलकृष्ट गुणौ रचयेत्तथा
इति कृते ऽखिल कर्मणि गोल को भ्रमति संस्थिति पूर्व निरक्षके । १०९ ।
नली से दो तुम्बी लटकायेंगे और उसमें पारद देंगे । तुम्बी द्वारा खींचने के
लिये गोल और तुम्बी के बीच सूत्र बान्धेंगे । इससे गोल यन्त्र विषुव वृत्त में
पूर्वापर वृत्त की तरह घूमेगा ।