सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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अक्षे सुवृत्त मसृणे विनियोज्यनाभिं
चक्रस्य तुल्य लघुता खिल वेष्टनस्य । १०० ।
चक्र के केन्द्र में एक छेद कर उसके भीतर एक गोल और चिकना आंख
(चिकनी नली) लगायेंगे, जिससे वह धुरी पर आसानी से घूम सके । उत्तर दक्षिण
दिशा में ३ हाथ ऊंचा दो खूंटा गाड़ कर उस पर एक धुरी पर यह चक्र लगायेंगे ।
चक्र का वजन समान होना चाहिये नहीं तो वह आसानी से नहीं घूमेगा ।
प्राक् पश्चिमाक्षि तिजयो रविचन्द्र चिह्ने
दत्वास्य वासर निशा परिवर्त हेतोः
प्रत्यग् भ्रमार्थ मपरक्षितिजाधर स्थं
ताम्रादि निर्मित मृजुनलकं निदध्यात् । १०१ ।
पूर्व और पश्चिम क्षितिज में सूर्य और चन्द्रचिह्न देकर यह दिन रात घुमाने के
लिए पश्चिम क्षितिज के नीचे ताम्बा आदि धातु की बनी एक सीधी नली स्थापित
करेंगे ।
षष्ट्यंगुल प्रमित तन्नलकोदरस्थ
तोयं यथा स्रवति षष्टि घटि भिरेवम्
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