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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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गोलाधिकारे गोलादि वर्णनम् ३५५
पात्र में जल जायेगा । इसमें जल के बदले बालू का भी व्यवहार किया जा सकता
है । इस समय के अनुसार दिन का समय भी जान सकते हैं ।
मयूर नर वानराः कुशल शिल्पिना कल्पिताः
ससूत्र नलको दराः सलिल गामि पात्र स्थिताैः
रसादिभ रनुद्भूतं निजमुखैश्च मण्यादिकं
गिलन्ति गुण गुम्फितं प्रतिमुहूर्त मिच्छा वशात् । ९६ ।
अच्छे शिल्पी द्वारा खोखला नर या वानर मूर्ति बनाकर उसके पेट में नली
लगाकर उसके भीतर एक लोहा का तार लगायेंगे । एक पानी से भरे बर्तन में
रखने पर पारद की तरह आकर्षण (Surface tension) के कारण उसमें बूंद बूंद
जल जाय इसकी व्यवस्था करेंगे । छेद की लम्बाई और मोटाई इस प्रकार स्थिर
करेंगे जिससे २ दण्ड (एक मुहूर्त) में एक बूंद (या कोई स्थिर चिह्न तक) पानी
जाय ।
गोलार्द्धाकृति घटितं सुताम्रपात्रम्
छिद्रेणाप्यति तनना तले समेतम्
कुण्डाम्भस्य बहलभित्ति पतितं सद्
घट्या मज्जति यदिदं कपालयन्त्रम् । ९७ ।
अर्द्ध गोलाकार ताम्बे का एक बर्तन तैयार करेंगे, जिसका तल थोड़ा चिपटा
हो (जिससे वह स्थिर रह सके) । उसके तल में एक छोटा छेद कर उसको पानी
के ऊपर रखने पर पात्र में धीरे धीरे पानी भरने लगेगा । छेद का आकार ऐसा
होगा जिससे एक घड़ी में पूरा पात्र भर जाय । इसे कपाल यन्त्र कहते हैं ।
भास्करेणोदितं यस्मात् फलकाक्षं सुविस्तरात्
यन्त्रं तदत्र न मया गदितं विदितं पुनः । ९८ ।
भास्कर ने फलक यन्त्र के बारे में विस्तार से कहा है अतः मैं पुनः नहीं कह
रहा हूँ ।
यन्त्रं स्वयं वह मिहाभिदधामि चक्रं
षष्टयं गुलावर्त्मल तुल्य नेमि
निर्माय यष्टि घटिकात्मक रेखिकाष्टयं
रेखान्तरे द्विषु (५) मिते वृत मंश चिहैः । ९९ ।
स्वयंवह यन्त्र के लिए ६० अंगुल परिधि का एक चक्र बनायेंगे । उसकी
परिधि पर प्रति अंगुल पर एक एक रेखा देंगे । नेमि की ६० रेखायें दिन-रात की
६० घटी के समान हैं । ५-५ अंश पर और एक चिह्न उस पर बनायेंगे ।
हस्तत्रयोन्नति मदुत्तर दक्षिणस्थ-
स्थूलाग्ररन्ध्र युग निश्चल सन्निवेशे