सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोलाधिकारे गोलादि वर्णनम ३४७
ततो विधेया ग्रह चक्र यष्टि रुदीच्य चक्रोदर भेद योग्या
सूक्ष्माग्र तिष्ठा पृथुमध्य भानुर्मूले पृथुः खेतर चक्र धृतौ । ५२ ।
इसके बाद उत्तरी चक्र में छेद कर उसमें लगाने के लिए ग्रह चक्र यष्टि
(डण्डा) तैयार करना होगा । यह यष्टि पतली होगी । और इसके अग्र भाग में
सूर्य रहेगा । यष्टि मूल की तरफ मोटा होगा जिससे अन्य ग्रहों को भी उसमें
लगाया जा सके ।
तद प्रजा पत्तनु कीलकाग्रे मध्यार्कतश्चाङ्गुल पाददूरे ।
न्यस्यौ रविस्तुङ्ग दिशि स्फुटाक्षः पृथुः पृथिव्या विमलः सुवृत्तः । ५३ ।
इस ग्रह चक्र यष्टि के छोर पर एक पतले कील पर मध्यम सूर्य लगाया
जायेगा तथा उससे १/४० अंगुल (१५ कला) दूरी पर उच्च की तरफ स्फुट रवि
लगाया जायेगा । यह पृथ्वी से बड़ा, चिकना और पूर्ण गोलाकार होगा ।
आधार दारू ग्रहचक्र यष्ट्यां सपादहस्तान्तर तोतरस्थम्
विन्यस्यतत् प्रोत दृढ़ारकाष्ठे स्त्रिहस्त कै द्वादशभिर्विधेयम् । ५४ ।
ग्रह चक्र यष्टि से ३० अंगुल (१ १/४ हाथ ) उत्तर आधार काठ देकर १२ अर
दिया जायेगा । प्रत्येक अर की लम्बाई ३ हाथ होगी ।
आधार चक्रं उदरस्थ रन्ध्र प्रस्यूत तिर्यग् यमदिङ् मुखस्य
अग्रेषु कील प्रचयस्य मध्य सूर्याभिवेष्ट ग्रह चक्र कक्षाः । ५५ ।
आधार चक्र के केन्द्र से निकले दक्षिण दिशा में तिरछी कील के बीच में
सूर्य तथा उसके चारों ओर ग्रहों की कक्षा का चक्र लगाया जायेगा ।
आमोचनीया वलयैः सुवृत्ता भासाक्षयोश्चापमपात जातैः
सक्षांशचिह्नाः स्पृहयात्र नेया तत्पृष्ठसूत्र प्रथितो प्रहालिः । ५६ ।
यह सभी ग्रह कक्षा उच्च, अपम, पात इत्यादि द्वारा चिह्नित किया जायेगा ।
उसमें राशि, अंश का चिह्न भी होगा । इसके भीतर (सतह पर) मंगल आदि ५
ग्रह होंगे । इसमें इच्छानुसार ग्रहों को यथा स्थान रखकर कक्षा चक्र (काठ की
वृत्ताकार पट्टी) को घुमाया जा सकता है ।
मध्यार्क संवेष्टन कृज्ज्ञ कक्षा धृत्य (१८)
ङ्गुला स्थाञ्चिपिटात्मपृष्ठा ।
तद्वत् सितस्यार्थगुणा (३५) ङ्गुला सद्यद्राङ्गुला
(७२) मंगल कक्षिकैव । ५७ ।
मध्यम सूर्य के चारों तरफ पहली कक्षा बुध की होगी जिसकी परिधि १८
अंगुल की होगी । दूसरी कक्षा शुक्र की ३५ अंगुल की तथा तीसरी कक्षा मंगल
की ७२ अंगुल की होगी ।