सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोलाधिकारे गोलादि वर्णनम् ३४५
कोणेषु दिक्षुः परितः प्रोतैः कीलैर्धृतः समिद् वलयः
क्षितिज समोन्नति रंशुक वेष्टित इदमर्द्धलुग् देयः । ४० ।
गोल क्षितिज के आठ दिशाओं में छोटी छोटी कीलं देकर नीचे से कपड़ा
से क्षितिज तक कपड़ा से ढंक देंगे । क्षितिज के ऊपर थोड़ा छोड़कर एक काठ
का क्षितिज कर नीचे से वहां तक ढंकेंगे जिससे गोल का ऊपरी आधा भाग
दीखे ।
किं वार्द्ध मग्न वपुषं गोलं खाते निधाय तद् भ्रमणात्
क्षितिजोपरिगत भार्द्धं भूस्थिति कृत्य बूधैर्दृश्यम् । ४१ ।
अथवा गोल रचना समाप्त होने पर उसको गड्ढे के भीतर इस प्रकार रखेंगे
जिससे क्षितिज का निचला आधा भाग गढे में रहेगा तथा ऊपरी भाग बाहर
रहेगा । इतना करने पर गोल को घुमा कर भूगोल स्थिति की कल्पना कर क्षितिज
के ऊपर के चक्रार्द्ध को देखा जा सकता है । जो कि दृश्य चक्रार्द्ध होगा ।
सिद्धान्त शिरोमणेः-बद्ध्वा भगोल एवं यष्ट्यां खगोल नलिकोक्तम्
प्रक्षिप्य भ्रमयेतं यष्ट्याधार स्थिरौ खदृग् गोलौ । इति । ४२ ।
(सिद्धान्त शिरोमणि के अनुसार) भगोल को ध्रुव यष्टि से बान्धकर यष्टि को
खगोल नली के भीतर घुसाकर भगोल को घुमायेंगे । यष्टि के अग्र भाग में दो
नलिका से खगोल और दृग्गोल को स्थिर और अचल कर स्थापित करना होगा ।
एक कक्ष यन्त्र का वर्णन -
धरणी गोल भगोल क दृग् गोल खगोल सन्निपातेऽपि
यन्त्रमिदमेक कक्षं ज्योतिश्चक्रं यदेकत्र । ४३ ।
भूगोल, भगोल दृग् गोल और आकाश गोलों से मिलकर बना यह द्विकक्ष
गोल एक कक्ष भी किया जा सकता है । ज्योतिश्चक्र
दृश्यं विधुकक्षात्मक भगोल एवाथ वा कुशाग्रधिय
पृथुलतरः क्षुद्रतरो गोलः कार्यः सुकल्पनया । ४४ ।
चन्द्रगोल में दीखने के कारण एक भगोल (चन्द्र के भगोल) में ही यह सब
लगाकर पहले के समान देखा जा सकता है । अति बुद्धिमान व्यक्ति अपनी
कल्पना के द्वारा इन गोलों का आकार बड़ा या छोटा भी बना सकते हैं ।
अथाभिधास्ये बहुकक्षयन्त्रं यत्प्रेक्षणादेव नभश्चराणाम्
सञ्चार बिम्बा शुगमान वक्रा वक्रादि साक्षाद् भवति क्षमायाम् । ४५ ।
अब मैं बहुकक्ष यन्त्र के बारे में कहता हूँ, जिसको देखने से ही ग्रहों का
सञ्चार, बिम्ब, शरमान, वक्रता, अवक्रता आदि पृथिवी पर रहकर ही प्रत्यक्ष भाव
से देखा जा सकता है ।