सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोलाधिकारे गोलादि वर्णनम् ३४१
भूमेर्निरक्ष रेखो परिखं रसोर्षबुधां (३६०) गुल प्रमिता
नाड़ी मण्डल मेषा नाड़ी फल चिह्निता कार्या । १४ ।
एक और ३६० अंगुल लम्बे बांस की पट्टी का वृत्त बनायेंगे और उसको पृथ्वी
की विषुवत रेखा के ठीक ऊपर अर्थात् क्षितिज और उर्ध्वाधर वृत्त के बीच में
रखेंगे । इसे नाड़ी मण्डल कहते हैं । इसमें नाड़ी पल भी चिह्नित करेंगें ।
तत्पार्श्वयो र्भुजैक द्वित्रि भुजापक्रम स्थलेषु पुनः
षड् वलयाः क्रमतोऽल्पाद्युरात्र वृत्तारूपया स्थाप्याः । १५ ।
विषुव वृत्त के दक्षिण उत्तर दोनों तरफ, १,२, और ३ राशि की क्रान्ति के
बराबर अंगुल की दूरी पर ३-३, कुल ६ अहोरात्र वृत्त (क्रमशः छोटे आकार का)
उस गोल में स्थापित करेंगे ।
ध्रुव यष्टि शिखा विद्ध स्वनाभि फलकद्वयं न्यसेदभितः
तन्नेमौ च शलाकाः खरस गुणा (३६०) सन्निवेश्यासााम् । १६ ।
ध्रुव यष्टि के दोनों तरफ दो वृत्ताकार पट्टा लगायेंगे । जिसके केन्द्र के छेद
में यष्टि को लगाया जायेगा । उसमें ३६० अंशों का चिह्नित कर प्रत्येक अंश पर
एक शलाका परिधि पर लगायेंगे ।
वलयार्द्धाकाराणामग्रपि वज्रलेपसदृढानि
कृत्वान्तरजतुलाधोर्न्यसेद् ध्रुवौ सौम्य याम्यौ च । १७ ।
शलाकाओं को वज्र लेप से दृढ़ कर देंगे जिससे वह गिरे नहीं । इस फलक
के मेष आरम्भ में (०° पर) उत्तर ध्रुव तथा तुला आरम्भ (१८०°) में दक्षिण ध्रुव
चिह्न देंगे ।
ध्रुव चिह्नात् फलकान्त वलये रेकांगु लान्तरै रंशाः
लेखास्तिर्यग् भांशा अथ गोले वेणुजैवैलयेः । १८ ।
ध्रुव चिह्न से फलक के अन्त में बांस के जो वलय हैं, उसमें एक एक अंगुल
पर अंश चिह्नित करेंगे (३६० अंगुल पर ३६० अंश) यह चिह्न फलक के चिन्हों
से तिरछे (दूसरे तल के वृत्त में) होंगे ।
आविषुवद् वलयान्तात् क्रमाधिकै र्गाढ़ सूत्र संनद्धैः ।
अक्षांशा रचनीया इत्यभितो भांश (३६०°) संस्थाने । १९ ।
काठ के पृथ्वी पर बांस पर गोले में ध्रुव से विषुव की तरफ बांस के पतले
पतले वृत्त चिपकायेंगे । ध्रुव से ये वृत्त क्रमशः मोटे होते जायेंगे । तथा विषुव
पर सबसे मोटा होगा ।
निश्चित्य राशि सन्थोन प्रवृत्तं तत्तदर्क संलग्नम्
अयनांशं संस्कृत तुला मेषाद्योः संस्पृशद् विषुवम् । २० ।