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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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३३४ सिद्धान्त दर्पण
दृक् सीमैक करस्यानुर्भवेति तत् वर्गो (२५६००००१) द्धतादिष्टनू
हस्तैर्मूलमभीष्टनू दृग्वधिश्चाहस्त लक्षाष्टकात् । १०२ ।
पृथ्वी का व्यासार्द्ध (१,२८,००,०००) हाथ है । इसके वर्ग को पृथ्वी के व्यासार्द्ध
वर्ग में १ जोड़कर उससे घटाने पर अन्तर फल का वर्गमूल निकालेंगे । यह एक
हाथ के शंकु की दृक् सीमा (५०५९/३९) हाथ होगी ।
इष्ट शंकु की दृक् सीमा निकालने के लिए एक हस्त शंकु की दृक् सीमा के
वर्ग को इष्ट शंकु की ऊंचाई से गुणा कर फल का वर्गमूल लेना होगा । इस
विधि से ८ लाख तक की दृक् सीमा आयेगी ।
दिनाब्द होरा मासे शज्ञानायान्यग्रहस्थितिः
दृष्टा तत्राल्प गतिकः स्थाप्य ऊर्ध्वे प्यधः पुनः । १०३ ।
दिन, वर्ष, होरा और मासों के अधिपति जानने के लिए अन्य प्रकार की
(प्राचीन) ग्रह स्थिति मानी जायेगी । सबसे कम गति वाले ग्रह को सबसे ऊपर
रखकर उससे नीचे