सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 430, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 430

भूगोल खगोल वर्णनम् ३३३
इसका उपयोग नहीं है ।
हस्तै रन्ध्ररसांग सिद्ध जलधि व्यो्राष्टभिः (८,०४,२८,९६०) संम्मितो
यन्मध्ये परिधिर्बभाविह महीपृष्ठे स्थितानांकमात् ।
शंकूनां किलतत्तदर्द्ध व पुषां क्रोशांघ्रि संख्या ब्रुवे
दृक् सीमां प्रथमोऽत्र षण्णवनभः पाथोधि हस्तोन्नचः । १०० ।
भूगोल के परिधि (८०४२४९६०) हाथ है । इस पर ११ शंकुओं की दृष्टि सीमा
का मान क्रोश के चतुर्थांश (१/४ कोस) में कहता हूँ । प्रथमशंकु का मान ४०९६
हाथ ऊंचा है । २ से ११ वें शंकु पहले से आधे हैं ।
दृग् भूपाः (१६२) शर शंकराः (११५) कुवसवः (८१)
सप्तेषवः (५७) खाब्धयो (४०) गोनेत्राणि (२९) नखा (२०)
श्रुतुर्र्दश (१४) दिशो (१०) गोत्राःशराः (५) प्रायशः इच्छानृघ्न
परा (४०९६) मद्दृङ् नृपकृतेः (२६२४४) सीमापदं गोः
स्वनूः सीमावर्गहतः पराकृति (२६२४४) हतो
नाद्यः (४०९६) स्वनांसीमतः । १०१ ।
शंकुओं की उच्चता और उनकी दृक् सीमा १/४ कोस में इस प्रकार -
शंकु संख्या शंकुउच्चता (हाथ में ) दृक् सीमा (१/४ कोस में )
१ ४०९६ १६२
२ २०४८ ११५
३ १०२४ ८१
४ ५१२ ५७
५ २५६ ४०
६ १२८ २९
७ ६४ २०
८ ३२ १४
९ १६ १०
१० ८ ७
११ ४ ५
इच्छा शंकु की दृक् सीमा निकालने के लिए शंकु की उच्चता में (४०९६)
हाथ से भाग देकर ४०९६ हाथ शंकु की दृक् सीमा (१६२ कोस पाद) के वर्ग
(२६,२४४) से गुणा करने उसका वर्गमूल लेते हैं ।
लक्ष्माष्ट दिनेश (१२८,००,०००) हस्तमवनि
व्यासाद्धमेतत् कृतिं (१६,३८,४०,००,००,००,०००)
सैकव्यास दलस्य (१२८,००,००१) वर्गंत (१६,३८,४०,०२५,५६,००, ००१)
ऋषी कृत्यावशेषात् (२५६,००,००१) पदम् (५०५९/३९) ।