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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 427, कुल 609 में से

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पृष्ठ 427

३३० सिद्धान्त दर्पण
होगी। पर्वत यदि बहुत दूर पर हो तो एक शंकु द्वारा उसकी उन्नतता निकाली जा
सकती है।
मातुमध्य धरोन्नत्या सह दृश्यां शमस्यहि
तिर्यग् विस्तीर्णता तिर्यक् शंकु नैवाव गच्छतु । ७९ ।
पर्वत का दृश्य भाग तथा भू पृष्ठ से ढंका अदृश्य भाग नापने के लिए तिर्यक
शंकु का व्यवहार होता है।
द्रुमाता शत हस्तत्तु दशहस्ताधिकान्तरौ
तावन्तौ वार्द्धमानौ वास्थाप्यौ तन्मितये नरौ । ८० ।
१०० हाथ तक ऊंचे किसी पेड़ की ऊंचाई नापने के लिए दस हाथ से अधिक
दूरी पर दो शंकु स्थापित करेंगे। उसके आधा अर्थात् ५ हाथ अन्तर पर भी यह
शंकु रखा जा सकता है। इन शंकुओं की उन्नतता भी १० हाथ या ५ हाथ होगी।
प्रमायार्केन्दु का शंकुप्रमेयच्छाययोर्गतिम्
तुल्यकाल भवां शंकु मेरुभागति ताड़ितः । ८१ ।
उस समय सूर्य या चन्द्र के कारण शंकु की छाया तथा मेरु (वृक्ष की चोटी)
की छाया की गति (लम्बाई) ज्ञात करेगी। शंकु को मेरु वृक्ष की चोटी छाया
की गति से गुणा कर
स्वभागत्याम उच्छ्रायोज्ञेयः शंकु भया तुसः
क्षुण्णः शंकु हतच्छाया मानं तत्तलतौ भवेत् । ८२ ।
अपनी छाया गति से भाग देने पर वृक्ष की उन्नति होगी। वृक्ष की उन्नति
को शंकु छाया से गुणा कर शंकु से भाग देने पर वृक्ष मूल से छायाग्र तक की
भूमि का मान होगा।
अव्यग्रस्याद् प्रखण्डस्यदृश्यार्कान्तर लिप्तिकाः
प्रमाय तत्क्षणं तद् भास्वस्थानान्तर हस्तकान् । ८३ ।
मेघ प्रायः स्थिर रहने पर उसमें और सूर्य के बीच की कोणीय दूरी को कला
में नापेंगे। उस समय अपने स्थान से पृथ्वी पर मेघ छाया की दूरी भी हाथों में
नापेंगे।
त्रिज्या हतान् भजेत्ताभिरुछायातोऽभ्रश्रुतिः फलम्
सा तत्काल नृभाध्याप्तात्तत् श्रुत्या दिनकृद्दिशि । ८४ ।
अपने स्थान से मेघ छाया की दूरी को त्रिज्या (३४३८) से गुणा कर सूर्य
और मेघ के बीच कलात्मक दूरी से भाग देंगे। फल मेघ छाया से मेघ तक कर्ण
(दूरी) का मान होगा। उस कर्ण को उसी काल के शंकुछाया से गुणा कर छाया
कर्ण से भाग देने पर सूर्य की दिशा में (मेघ कर्ण से मेघ तल तक की दूरी होगी।)

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