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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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सिद्धान्त दर्पण

उस प्रकाश व्यास से छिद्र का व्यास घटाने पर हार होता है । उस दीवाल
और छिद्र के बीच की दूरी को बिम्ब प्रमाण से गुणा कर हार से भाग देने पर
(सूर्य का) स्फुट कर्ण आता है ।
यस्य यस्य ग्रहस्यापि चन्द्रेणास्त मयोदयौ ।
विलोक्यते समंतस्य मण्डलं ज्ञातु मिष्यते । ६५ ।
जिस तारा और ग्रह का चन्द्र के साथ अस्त होता है । उनके मण्डल का
मान जानने के लिए -
षट् त्रिंशद् हस्ततो दूरे चन्द्र बिम्बाभिधायकम्
अताराच्छादकं न्यस्य कुत्रचित्ताल वृन्तकम् । ६६ ।
अपने दृष्टि स्थान से ३६ हाथ की दूरी पर एक ताल पत्र इस आकार का
रखेंगे, जिससे उतनी दूरी पर चन्द्र बिम्ब ढंक सके । उसको ऐसे स्थान पर रखेंगे,
जिससे तारा बिम्ब नहीं ढंके ।
चन्द्र बिम्बैक देशोऽत्र यथा तत्तारका समः
दृश्यते शुषिरं तद् वत् कार्यं तत्पादसं गुणात् । ६७ ।
उसमें इतना बड़ा छेद करेंगे जिससे तारा (तारा ग्रह ) का बिम्ब पूरादीख