सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 415, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंउनविंश प्रकाशः
भूगोल खगोल वर्णनम्
स्रष्टुर्या या शरीरेन्द्रिय विषयमयी भूतसृष्टिः पुरासी-
तत्तद् बीजं द्विधान्तर्बहि रभवदितः पञ्चकम् मण्डलानाम्
बाह्यं ब्रह्माण्ड भाण्डावृति रुदरसमा कारमन्तः ख वा यो
र्बिम्ब द्वन्द्वं रवीन्दुक्षितय इह महस्तोय भूमण्डलानि । १ ।
सभी प्राणियों की सृष्टि के पूर्व ब्रह्मा ने शरीर के इन्द्रिय और विषय रूप
सृष्टि के लिये दो प्रकार के बीजों अन्त बीज और बहि बीज से पांच मण्डल
उत्पन्न किये । बाह्य बीज ही ब्राह्माण्ड भाण्ड का आवरण हुआ । अन्तबीज से
पांच मण्डल उसके उदर में उत्पन्न हुए-आकाश, वायुमण्डल, रवितेज मण्डल,
चन्द्रगोल मण्डल तथा पृथ्वी मण्डल ।
योऽसावाकाश मेरुर्मरु दितिगतितोवृत्त यष्टि स्वरूप-
स्त त्युतिस्था सुलोक प्रकर विटपिनो मूलतुल्यात् कुगोलात्
वायुस्कन्धाः समन्ताद्वहिरुपचयिनः सन्ति सप्तावहाद्या
आब्रह्माण्डादिहास्ते स्थिर चरमखिलं भग्रहाम्भोदराद्यम् । २ ।
आकाश के मेरु को ही मरुत् कहा गया है । आकाश वृत्त में मेरू (दोनों
मेरू को मिलाने वाली रेखा) यष्टि (दण्ड या धुरी) के समान है । (इसके चारों
ओर नक्षत्र मण्डल परिक्रमा करते हैं ।) इसी मेरुदण्ड से भुवन बन्धे हुए हैं । इस
भुवन रूपी वृक्ष के मूल पृथ्वी से आरम्भ कर ब्रह्माण्ड तक आवह आदि सात
वायु स्कन्ध बाहर की तरफ क्रमशः बड़े और पहले को ढके हुये हैं । इसी सप्त
वायु स्कन्ध के भीतर चल अचल सृष्टि, तारा, ग्रह, मेघ आदि हैं ।
सिद्धान्त शिरोमणौ-भूवायुरवह इह प्रवहस्तदूर्ध्वं
स्यादुद् वह स्तदनु संवह संज्ञकश्च
अन्यस्ततोऽपि सुवहः परिपूर्णकोऽस्माद्
बाह्यः परावह इमे पवनाः प्रसिद्धाः । ३ ।
सिद्धान्त शिरोमणि में कहा है-भूवायु को आवह कहते हैं । उससे ऊपर एक
के बाद एक प्रवह, उद्वह, संवह, सुवह, परिवह और परावह इस प्रकार वायु
के विभाग हैं ।
भूमेर्बहि द्वादश योजनानि भूवायु साम्बुदविद्युदाद्यम्
तदूर्ध्वगो यः प्रवहः स नित्यं प्रत्यग् गतिस्तस्य तुमध्य संस्था । ४ ।
पृथ्वी से १२ योजन तक भूवायु है । इसी के भीतर मेघ और विद्युत आदि
रहते हैं । उसके ऊपर प्रवह वायु है । जिसकी गति सदा पूर्व से पश्चिम दिशा में
है । इसी के मध्य में स्थित