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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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भूगोल विवरणम् ३१७
पैर की उंगली पर खड़ा होकर अपने दोनों हाथ ऊपर उठाने से पुरुष की जो
ऊंचाई होती है उसके १/५ भाग की एक हाथ कहा जाता है । इस मान से २८,
१६० हाथ का एक योजन पण्डितों ने माना है । इस मान के अनुसार ३०९३/४०
योजन पृथ्वी की परिधि तथा ९८४।४५ योजन व्यास होगा ।
नागाष्टाब्धि रसाब्धि खानल (३०,४६,४८८) मितंपञ्चाशताकोटिभिः
स्यादल्पाभ्यधिकैर्धनाभिधफलं गर्भेऽस्यतद् योजनेः (५००००४८४३)
तुल्यं खाशुग (५०) कोटि भिश्छ विकला द्यानां वियोगाद् भवे-
दित्थं भू विततिः कृताथ नभसि ज्योतिः क्रमे विक्ष्यते । १७५ ।
इसके अनुसार पृथ्वी का क्षेत्रफल ३०,४६,४८८ योजन तथा घनफल
५००००४८४३ जिससे अन्तिम अल्पमान घटाने पर प्रायः ५० कोटियोजन पृथ्वी का
घनफल होगा । इस प्रकार पृथ्वी का विवरण समाप्त कर अब मैं आकाश के
ज्योतिर्पिण्डों के बारे में कहूँगा ।
नीलारविन्द सुमिलिन्द कलिन्द जेन्द्र-नीलाम्बुदालि दलिताञ्जन पुञ्ज मञ्जुम
नीलाचलाधर शिरोमुकुटायमानं नीलाम्बुरानु जम जं शरणं ब्रजामः । १७६ ।
नील कमल, श्रेष्ठ भ्रमर, इन्द्रनील मणि, यमुना के नील जल, काजल के
समान काला चमकदार शोभा के साथ नीलाचल शिखर पर मुकुट के समान
शोभित नीलम्बर (बलराम) के अनुज की शरण में जाता हूँ ।
इत्युत्कलो ज्वल नृपाल कुल प्रसूत
श्री चन्द्रशेखर कृतौ गणितेऽक्षि सिद्धे
सिद्धान्त दर्पण उपाहित बालबोधे
ह्यष्टादशो गत इलाविवृतिः प्रकाशः । १७७ ।
इस प्रकार उड़ीसा के विख्यात राजकुल में उत्पन्न श्री चन्द्रशेखर द्वारा गणना
एवं दर्शन में समानता तथा बालकों की शिक्षा के लिए लिखे सिद्धान्त दर्पण में
भूगोल विवरण सहित १८ वां अध्याय समाप्त हुआ ।