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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 409

लोक व्यवस्थितिरुपर्युपरिप्रदिष्टा
ब्रह्माण्ड भाण्ड जठरेतदिदं समस्तम् । इति । १५२ ।
इन श्लोकों में पृथ्‍वी, पर्वत, देव, दानव, मानव, नक्षत्र, ग्रह और उनकी
कक्षा, मह, जन, तप आदि एक के ऊपर एक श्लोकों की स्थिति कही गयी । ये
सभी ब्रह्माण्ड के उदर रूपी भाण्ड में ही एक आधार से स्थित हैं । (सिद्धान्त
शिरोमणि का उद्धरण समाप्त) ।
भूव्यासः खख भूप (१६००) योजनमितः सोद् यर्क्षनन्दाग्निभिः (३९२७)
क्षुण्णः खाशुगसूर्य (१२५०) हत् स्वपरिधिः सूक्ष्मोऽपि कक्षावलौ ।
खेटानां भूविलिप्तिकांश घटना सौकर्यहेतो रिह-
व्यासः खाभ्ररसा (६००) हतः कुनव भू (१९१) भक्तो मतो वेष्टनम् । १५३।
पृथ्‍वी का व्यास (१६००) योजन है । इसे (३९२७) से गुणा कर (१२५०) से
भाग देने पर पृथ्‍वी की परिधि का मान आता है । पृथ्‍वी, ग्रह तथा उनकी कक्षा
आदि के व्यास से उनकी परिधि निकालने की एक और सरल विधि है । पृथ्‍वी
(या किसी ग्रह) के व्यास को ६०० से गुणा कर १९१ से भाग देने पर भी उसकी
परिधि होगी ।
तस्याद् योजनसंख्ययाकूपरिधिः षट् पक्षशून्याशुगाः (५०२६)
षष्ट्यंशौ दर्शभिस्ततः (१०) क्षितिकृतैः (४१)
सार्द्धं मयात्रोदिताः (५०२६।१०।४१)
व्यासघ्नः परिधिः कुपृष्ठफलं वाणाष्ट
नागावनी, वेदाग्न द्विरदा (८०,४१,८८५)
स्ततो घनफलं व्यासांग (६) भागाहतेः (२१४४५०२६६६।४०) । १५४ ।
इस विधि से पृथ्‍वी की परिधि (१६०० x ६००) / १९१ = ५०२६ । १० । ४१ योजन है ।
जो मेरा (लेखक का) भी मत है । पृथ्‍वी परिधि को पुनः व्यास से गुणा
करने से पृष्ठफल हुआ ५०२६।१०।४१ x १६०० = ८०,४१,८८५ योजन (वर्ग) इससे
पृथ्‍वी का घनफल (पृष्ठफल x व्यास /६)
हुआ (८०,४१,८८५ x १६००) / ६ = २,१४,४५,०२,६६६ । ४० ।
क्ष्मापृष्ठस्य निरक्षदेशत उदग् भागे स्थलं योजने
बाणाद्रीन्दुशरेषु वाण विधुभि (१५,५५,१७५) स्तोयं मितं चाम्बुधेः
शून्यद्व्यग्नि रसेषु सागर भुजै (२४,५६,३२०) र्याम्ये दले शून्यगे
रामाक्षीषु (५५२३९०) स्थलं ख खाष्टाद्रय ब्धि रामे र्जलम् । १५५ ।