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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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३०८ सिद्धान्त दर्पण
जम्बूफलामलगल द्रसतः प्रवृत्ता
जम्बूनदोरसहुते मृदभूत् सुवर्णम् ।
जाम्बूनदं हि तदप सुरसिद्ध संघाः
शाश्वत्पिवन्त्यमृतपान पराङ्मुखास्ते । १२९ ।
पके हुए जम्बू फल के रस गिरने से जम्बू रस की एक नदी बन गयी है ।
जिसके संसर्ग से मिट्टी से सोना बना । इस जम्बू नद का पानी पीने के लिये
देवताओं और सिद्धों का इतना आग्रह है कि वे अमृत पान से भी विमुख हो जाते
हैं ।
वनं तथा चैत्र रथं विचित्रं तेष्वप्सरो नन्दन नन्दनञ्च
धृत्याह्वयं यद् धृतिकृत् सुराणां भ्राजिष्णवैभ्राजमिति प्रसिद्धम् । १३० ।
मेरु के चार विष्कुम्भ पर्वतों के नीचे के भाग में चार वन हैं । प्रसिद्ध हैं-चैत्ररथ
अत्यन्त विचित्र है, नन्दन में अप्सरायें क्रीड़ा करती है, धृति वन देवताओं को धैर्य
देता है । तथा वैभ्राज अत्यन्त रुचिकर है ।
संरास्यथैतेष्वरुणञ्च मानस महाहदं श्वेत जलं यथाक्रमम्
सरत्सुरामा रमणश्रमालसाः सुरा रमन्ते जल के लिलालसाः । १३१ ।
इन चार वनों में चार हृद (झील) हैं- अरुण, मानस, महाह्रद और श्वेत
दल) देव स्त्रियां घूमने से थककर इन्हीं हृदों में जल क्रीड़ा करती हैं ।
सद्रत्नकाञ्चनमयं शिखरत्रयञ्च
मेरौ मुरारिक परारिपुराणि तेषु
तेषामधः शतमखज्वनान्त संख्य
रक्षोऽम्बुपानिल धनेशपुराणि चाष्टौ । १३२ ।
मेरु के पर्वत के तीन शृंग हैं-प्रत्येक रत्न और स्वर्ण से बने हैं । एक पर
विष्णु, दूसरे पर ब्रह्मा और तीसरे पर शिव अपना अपना पुर बनाकर रहते हैं ।
इन चोटियों के नीचे क्रमशः इन्द्र, अग्नि, यम, राक्षस, वरुण, पवन, कुबेर तथा
शिव के नगर हैं ।
विष्णु पदी विष्णुपदा त्यतिता मेरौ चतुर्द्धास्मात्
विष्कुम्भा चल मस्तक शस्तसरः संगता वयता । १३३ ।
विष्णु के पाद से निकल कर गंगा का अवतरण पहले मेरू पर हुआ । उससे
वह चार भागों में विभक्त होकर चार विष्कुम्भ पर्वतों के नीचे के चार हृदों में
मिल कर आगे बढ़ी ।
शीतारूया भद्राश्वं सालकनन्दा च भारतं वर्षम्
वंक्षुश्च केतुमालम् भद्रारूया चोत्तरान कुरुन् याता । १३४ ।
शीता गंगा भद्राश्व देश में, अलकनन्दा (गंगा) भारत वर्ष में वंक्षु गंगा