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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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भूगोल विवरणम् ३०१
सार्द्धांशा (११/३०) स्तत्रलम्बांश दृष्ट्यंशाः पञ्चविंशति (२५)
तच्चापान्तर्गतः सूर्य क्षितिजाद् विश्वभागकैः । ८३ ।
क्योंकि उसका लम्बांश (११°/३०') अंक्षाश ७८°/३०') होने से दृष्ट्यंश (२५°)
इसके चाप के बीच में स्थित सूर्य क्षितिज से १३° उच्च देवताओं को दीखेगा ।
अतः यह नहीं कहा जा सकता है कि देवता लोग ६ मास सूर्य को नहीं देखते ।
उच्चस्थो द्रक्ष्यते देवैः षण्मासास्तमय कथम्
विषुवत्कालके खण्ड ग्रहणे शीतगोस्तथा । ८४ ।
सम दिवस (जब सूर्य विषुव रेखा ०° क्रान्ति पर हो) में तब चन्द्र के खण्ड
ग्रहण में
अद्रक्षतः कुभान्तःस्थ मेरुच्छाया चतुः कला
अतो मेरूर्न्नति न्यूनं मन्यतां हिमवन् मिते । ८५ ।
भू छाया के अन्तर्गत मेरू की छाया ४ कला अधिक दीखती है । अतः
हिमवान की उच्चता से मेरू की उच्चता