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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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३०० सिद्धान्त दर्पण
ऊपर हिमालय नीलाद्रि से दृश्य होना चाहिये ।
धूमधूलि हिम घनेर दृष्टोऽपीह दूरगे
छादनाद् ध्रुवमत्स्यस्थ भाना स्यात्तत्समक्षता । ७७ ।
धूम, धूलि, हिम और मेघ द्वारा आच्छादित होने के कारण अति दूरी पर ये
पर्वत दीखते नहीं हैं । पर ध्रुव मत्स्य के अनेक नक्षत्र उसके सामने होने के कारण
(अवरोध से)
अतोन् तावदौन्नत्यं सिद्धं नायाम विस्तृती
प्रत्यक्षे तस्य तुच्छत्वं खार्णवांश (४०) मितं ततः । ७८ ।
हिमालय की स्थिति प्रत्यक्ष (आभास) होती है । पर उससे उसकी ऊंचाई,
लम्बाई और विस्तार वास्तव में सिद्ध नहीं होता । नक्षत्र मेघ आदि के कारण भी
छिप सकते हैं, यदि उतनी ऊंचाई तक हिमालय नहीं भी होता । वास्तव में
हिमालय की उन्नता ४० अंश ही है ।
सोऽयुतद्वय (२०,०००) हस्तोङ्गः शंकुश्चेत्संस्कृतः पुनः
दृग्दन्त (३२२) विकलास्तावत्युत्क्रमज्या (५/२