सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 394, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ें"ता गोल परिधिक्षुण्णं भचक्र कलिको द् धृताः । ५८ ।"
Wait:
"ता" - 'त' with 'ा'.
"गोल" - 'ग' with 'ो', 'ल'.
"परिधिक्षुण्णं" - 'प', 'र' with 'ि', 'ध' with 'ि', 'क्ष' with 'ु', 'ण्' with 'ण' and anusvara = परिधिक्षुण्णं.
"भचक्र" - 'भ', 'च', 'क' with '्' and 'र' = भचक्र.
"कलिको द् धृताः" - 'क', 'ल' with 'ि', 'क' with 'ो', space, 'द्', space, 'ध' with 'ृ', 'त' with 'ा' and visarga (ः) = धृताः.
Wait, is it "धृताः" or "धृता"? Look at the end: there is a visarga: "धृताः । ५८ ।".
Wait, look at "द् धृताः":
'द्' has a virama: "द् धृताः".
Line 16:
"फल उत्क्रम ज्या होगी । उसका चाप करने पर वह दृष्टि मार्ग लिप्ता में"
Line 17:
"होगा । उसको भूगोल की परिधि से गुणा कर भचक्र की कला (२१,६००) से भाग"
Line 18:
"दे