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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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भूगोल विवरणम् २९५
ततेङ्गीकृतं भौमज्योति रौपाधिकोपमम्
सूर्या शुपाधिकं तेजो यद् ग्रहेषु तथेष्यते । ४१ ।
अतः उनकी ज्योति पृथ्वी की ज्योति के समान औपाधिक है (उसी प्रकार
की है । सूर्य का औपाधिक तेज जिस ग्रह के ऊपर पड़ता है वही दीखता है ।
वर्णभेदो यथा वन्हेः स्यादाधारविशेषतः
तथाभेषु ग्रहेषु स्याद् भिन्ना सौपाधिको द्युतिः । ४२ ।
आधार के कारण जिस प्रकार अग्नि के वर्ण में भिन्नता आती है उसी प्रकार
सूर्य की किरण एक ही वर्ण की होती है, पर भिन्न भिन्न ग्रहों पर उसका अलग
अलग रंग होता है ।
पितरश्चन्द्र बिम्बस्य श्रूयन्ते पृष्ठवासिनः
यथा तथान्य ग्रह भेष्वपि स्थानं प्रतीयते । ४३ ।
(शास्त्र के अनुसार) चन्द्र के पृष्ठ प्रदेश में पितृ लोक रहते हैं । ठीक इसी
प्रकार अन्य ग्रहों पर भी भिन्न भिन्न प्राणी रहते हैं ।
यद्यद् भूतमया लोका स्तत्र तन्मय देहिनः
वर्तन्ते पार्थिवांशस्य सम्पर्काद् व्यवहारितः । ४४ ।
जिस महाभूत से जो लोक बना है वहां उसी महा भूत के शरीर वाले प्राणी
रहते हैं । पृथ्वी के जिस अंश के सम्पर्क में वे अधिक आते हैं । उसी का व्यवहार
करते हैं ।
ब्रह्माण्ड मध्य संस्थानो भूगोलः पाञ्चभौतिक
तदा रम्भकतामाप्तं भूमिभाग चतुष्टयम् । ४५ ।
ब्रह्माण्ड के मध्य में स्थित पृथ्वी पांच भूतों से बनी है । आरम्भ में इसमें ४
भाग (८ भाग में) भूमि का भाग था ।
जलादि भूत भागानां चतुष्कं पूर्ववत् मतम् ।
पृष्ठमस्याब्धि भागं सजल भागत्रयान्वितम् । ४६ ।
पहले लिखे गये मत के अनुसार जल आदि चार भूत प्रत्येक का एक एक
भाग था । पृथ्वी की सतह पर ३ भाग जल का है-
एकेनस्थल भागेन लक्ष्यते प्रायशो जनैः
गोल पृष्ठ चतुर्थांश स्थलेऽखिल जन स्थितः । ४७ ।
तथा एक भाग स्थल लोगों को दीखता है । इस प्रकार गोल सतह के एक
चतुर्थांश भाग स्थल में ही सभी मनुष्य स्थित है ।
लवणोदधिमध्यस्थं महाद्वीप द्वयं पृथक्
ऊर्ध्वा धराभिधं तत्र महानुद्धवोऽधरंस्तनुः । ४८ ।