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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 374, कुल 609 में से

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पृष्ठ 374

भूगोलस्थिति वर्णनम् २७७
और सूर्य को इसी प्रकार छोटा और बड़ा पिण्ड मान कर
तद् भार केन्द्र रवि बिम्ब मध्ये पतत्यतः तिष्ठतितत् ख मध्ये
क्ष्मा दूरगा भ्राम्यति युक्ति रेशा तवास्ति चेत्सापि भवेत् सदोषा । १०७ ।
दोनों का भारकेन्द्र सूर्य बिम्ब में पड़ता है । अतः सूर्य बिम्ब को आकाश
मध्य में और स्थिर माना गया है । इस प्रकार दूर पर स्थित पृथ्वी विशाल वृत्त
में रह कर भ्रमण कर रही है । यदि सूर्य के स्थिर और पृथ्वी के चल होने का
यही कारण आप बताते हैं तो इसमें भी दोष है ।
यत् तन्मते घनफलेन (५,१२,३४,२०,०,४,६७,७०७)
गुरो (४६,०८२) विभक्ताद् भास्वद् घनात्
(४५,९२,६४,६२,९१,३३,५३,८८२) फलमभूद्रसगोऽष्ट
(८९६) संख्य सैकैत (८९७) दाप्त मुभयान्तर वर्त्म
(२४,५०,००,०००) लब्धं क्रोशात्मकं धृतिनखाचल बाहु संख्यम् । १०८ ।
सूर्य भार उसके आकार के घनफल के अनुपात में है उसे वृहस्पति के भार
वृहस्पति व्यास के घनफल ) से भाग देने पर
४५,९२,६४,६२,९१,३३,५३,८८२
────────────────────────── = ८९६ + शेष
५१,२३,४२,००,४६७,७०७
आता है । लब्धि में एक जोड़ने पर ८९७ आता है । इससे सूर्य और गुरु की
दूरी को भाग में देने पर
२४,५०,००,०००
────────────── = २,७,२०,१८ कोस आता है ।
८९७
यन्मध्यतो रवि तनोरियतान्तरेण
स्याद् भारकेन्द्र मधिकं रविमण्डलाद्धत्
सार्द्धेन्दु भूप भुज दृग भुज (२,२२,१६१) सम्मितात्तद्
बाह्ये पतत्यत इनस्य कथं स्थिरत्वम् । १०९ ।
अतः सूर्य केन्द्र से २,७२,०१८ कोस दूरी पर भार केन्द्र होना चाहिये । रवि
व्यासाद्धं २,२२,१६१ x १/२ है, जो भार केन्द्र की दूरी के आधे से कुछ कम है ।
अतः भार केन्द्र किसी प्रकार सूर्य बिम्ब में नहीं आता है । अतः सूर्य की स्थिरता
के लिये आपने जो कारण दिया है वह ठीक नहीं है ।
अत्रापि सूर्या भिमुखत्व सिद्धिः सर्वग्रहाणां समकालता च
कक्षाभ्रमे सम्भवतीत्य सिद्धा तत्कल्पना नल्प मतेकृता किम् । ११० ।
यहां भी सूर्य केन्द्र की तरफ सभी ग्रहों का कक्षा भ्रमण से भगण काल समता
सिद्ध होता है । फिर आप इतने बुद्धि मान होकर भार केन्द्र की कल्पना क्यों करते
हैं, जो सूर्य बिम्ब में अलग है ।