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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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२७४ सिद्धान्त दर्पण
मध्यम रवि को सभी ग्रहों का कक्षा केन्द्र मानने से स्पष्ट ग्रह सब समय
दृकसिद्ध होते रहे हैं ।
स्फुटार्क स्येति केन्द्रत्वा सिद्धावाकृष्य भावतः
निजोच्च देवताकृष्ट श्चन्द्रवद् भ्रान्ति मेति सः । ८९ ।
अतः स्फुट रवि ग्रह कक्षा के केन्द्र में नहीं है, इससे सिद्ध हुआ कि ग्रह
स्फुट रवि की तरफ आकर्षित नहीं है और वह अपने उच्चके देवता से आकृष्ट
होकर चन्द्र के समान स्वयं घूमते हैं । यही मानना युक्ति युक्त लगता है ।
चक्रार्द्ध योगाद् भृगु जस्य चन्द्र फलाल्प भावादय भूमिजस्य
परोच्च मन्दोच्चफलाल्प भेदात् तौदृक् समौ वा भवदुक्तितः स्वाम् । ९० ।
चक्रार्द्ध में रहने पर शुक्र का मन्दफल अत्यन्त कम है तथा मंगल के परोच्च
और मन्दोच्च में बहुत कम अन्तर होने के कारण आपके मत से भी वह दोनों दृक्
सिद्ध हो सकते हैं ।
स्थित्वा स्वमध्येऽपमण्डला नुसारात् तनु भ्रान्ति मता सवित्रा
आकृष्ट कक्षाः सुतरां प्रयान्तु बुधादयः क्रान्ति पथेन खेटाः । ९१ ।
किन्तु आकाश में क्रान्ति वृत्त के धरातल में अपने अक्ष ( धरातल पर लम्बरूप)
पर घूमते हुए सूर्य से आकर्षण के कारण बुध आदि ग्रह क्रान्ति वृत्त में ही गति
कर सकते हैं । उनका विमण्डल क्रान्ति वृत्त में होगा )
तयार्यमा कर्षत कक्षया भुवा विधुः समाकृष्ट तनु प्रयाति चेत् ।
तदा कुगोल भ्रमि सिद्ध्या दिशा प्रयातु मेवा र्हति नान्यथा क्वचित् । ९२ ।
उसी सूर्य द्वारा आकर्षित होकर पृथिवी चलती है तथा पृथिवी के आकर्षण से
चन्द्र चलता है । यदि ऐसा है तो चन्द्र भी पृथिवी की तरह अपने अक्ष पर घूमने
की दिशा में जाने को बाध्य है, अन्य दिशा में नहीं जा सकता ।
क्षितेस्तथा क्रान्ति पथाभिमुख्यतो विदिश्यपि स्याद् विषुवेध्रुवेक्षणम्
न चाप मस्तद् ध्रुव पार्श्वक भ्रमे भवेद् विधोरित्यवला चला कथम् । ९३ ।
और भी, सूर्य के आकर्षण के कारण पृथिवी की गति क्रान्ति कृत में होने से
(पृथिवी की अक्ष पर गति भी उसी तल में होगी) तथा विषुव दिन पर ध्रुव एक
कोण पर दीखेगा (विषुव क्षेत्र से) । पुनः पृथिवी की क्रान्ति वृत्त गति से आकृष्ट
चन्द्र की स्पष्ट क्रान्ति कैसे होगी । वह क्रान्ति वृत्त में ही चलेगा । इन सबसे
पृथिवी का स्थिर होना सिद्ध है ।
मन्दोच्च पाता प्रभवाधरोर्द्धव याम्योत्तरावस्थिति दृष्टि हेतो
प्रति व्यपादि भ्रममण्डलानां योगाद् यदुत्पद्यत एव वृत्तम् । ९४ ।
मन्दोच्च, शीघ्रोच्च और पात आदि के कारण ग्रह की ऊपर, नीचे उत्तर तथा
दक्षिण में अवस्थिति होती है-इस गति को मार्ग दिखाने वाले वृत्त वास्तविक