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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 367, कुल 609 में से

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२७० सिद्धान्त दर्पण
इसी प्रकार चन्द्र का क्रान्ति मार्ग (विमण्डल) अत्यन्त सरल होने के कारण
चन्द्र का कलंक भी पृथ्वी वासियों को एक ही प्रकार दीखना चाहिये । किन्तु
यह भी नहीं होता, चन्द्र कलंक भिन्न भिन्न आकार (दिशा) में पृथ्वी से दीखता
है (अतः ग्रन्थकार के मत से पृथ्वी का भ्रमण नहीं होता)
केन्द्राभिमुख्य घटना कृष्टस्यामां तथापि भूमति
अदिन कराभिमुख्यतया स्रष्टुः सेच्छा वसात्क्रान्तो । ६८ ।
यदि तुम्हारा कहना है कि सूर्य केन्द्र द्वारा आकृष्ट होने पर भी पृथ्वी की गति
सूर्य की दिशा में न होकर क्रान्ति वृत्त में सृष्टि कर्त्ता की इच्छा के कारण है, तो
मैं कहूँगा कि उसी सृष्टि कर्त्ता की इच्छा से पृथ्वी स्थिर रहे उसमें हलचल नहीं
हो ।
इति वदसि तदिच्छा प्रामाण्यै मन्यतां महीस्थास्युः
आकर्षण गुरु भानोः स्याचेत् किं नास्ति तत् क्ष्मायां । ६९ ।
यदि बड़ा होने के कारण सूर्य में आकर्षण है (ऐसा कहते हो) तो वह पृथ्वी
में भी क्यों नहीं होगा । (आकर्षण शक्ति केवल बड़ी वस्तु में ही कैसे होगी ?
स्थिराश्मकान्तेन कृशेनयस्मादाकृष्यते तत् पृथुलोह पिण्डः
आकर्षणे कारणमेव शक्ति र्निसर्ग का नो पृथुता न तेजः । ७० ।
स्थिर छोटा लौह चुम्बक भी बड़े पिण्ड को खींचता है । इससे यह सिद्ध है
कि आकर्षण शक्ति का कारण पिण्ड का बड़ा होना नहीं, उसकी अपनी स्वाभाविक
(नैसर्गिक) शक्ति है ।
यदि क्षुद्र द्रव्यं भ्रमति वृहदाकर्षण बला-
नतु क्षुद्रं स्थूलं भ्रमण कृदियं वाक् तव तदा ।
स्वतन्त्रत्वे सा सम्भवति न पराधीन वलयो-
र्यतः सर्वाकर्षिणयुत भगवदिच्छा बलवती । ७१ ।
इतना समझाने पर भी यदि तुम्हारा कहना है कि बड़ी वस्तु छोटे को खींच
सकती है पर छोटी वस्तु बड़े को नहीं तो मेरा उत्तर है कि यह स्वतन्त्र वस्तु के
लिये ही यह बात सम्भव है । जिस द्रव्य (छोटा या बड़ा) में स्वाधीन बल नहीं
है उसके लिये यह ठीक नहीं है । प्रत्येक वस्तु को आकर्षित करने वाली शक्ति
सदा भगवान की इच्छा के अधीन है ।
तड़ागान्तर्यष्टि कृश तनु मनु क्रामति यथा
महानौः कैवर्त्ता चरण परतन्त्रा जगदिदम्
तथा पर्यत्यर्कः पृथुरपि महेशा शयवशात् -
त्रिलोको लोकानामवनविधये सग्रह गणः । ७१ ।
जिस प्रकार तालाब में स्थित छोटे यूप दण्ड को नाविक की इच्छा के कारण