सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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भूगोलस्थिति वर्णनम् २७१
बड़ी बड़ी नौकायें परिक्रमा करती हैं, उसी प्रकार ईश्वर की इच्छा से छोटी पृथ्वी
की परिक्रमा विशाल सूर्य अन्य ग्रहों के साथ त्रिभुवन के लोकोपकार के लिये
करता है ।
सूर्योवान्य ग्रहो वा निजतन परतो भ्रान्त माघ्नोतु तस्याः
का हानि र्भू स्थित्वे भवति वदसखे यस्य योऽस्ति स्वभावः
सोऽन्येषां दर्शनात् किं व्यभिचरति भवान् यन्त्र साहाय्य वत्वात्
सर्वेषां भ्रान्ति दर्शो न किमुडु पततोः पश्यति भ्रान्ति मारात् । ७३ ।
सूर्य और अन्य ग्रह अपने अक्ष पर घूमते है । इस कथा के साथ पृथ्वी के
स्थिर रहने में क्या विरोध है ? कौन चलता है और कौन नहीं चलता इसमें कोई
कठिनाई नहीं है- जिसकी जैसा स्वभाव है वैसा करेगा । आपने यन्त्र की सहायता
से ग्रहों की गति देख ली पर निकट के चन्द्र की (अपने अक्ष पर) गति क्यों नहीं
देख पाये ?
भ्रान्ति र्नोपग्रहाणां प्रभवति महतां खेचराणामिवे