सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूगोलस्थिति वर्णनम् २६१
सूर्य सिद्धान्ते-स्वल्पकायतया लोकाः स्वस्थानात्सर्वतोदिशम्।
पश्यन्ति वृत्तामप्येतां चक्राकारां वसुन्धराम्। इति। १७।
पृथ्वी की तुलना में मनुष्य का आकार अत्यन्त छोटा होने के कारण वह
सभी दिशाओं में बहुत कम दूरी तक देख पाता है और पृथ्वी के गोल आकार
की वक्रता नहीं दीखती। अतः पृथ्वी चक्राकार दीखती है।
सिद्धान्त शिरोमणौ - यदि समा मुकुरोदर सन्निभा भगवती धरणीतरणीःक्षिते
उपरिदूर गतोऽपि परि भ्रमन् किमुनरै रमरै रिवनिक्ष्यते। १८।
भगवती पृथ्वी यदि थाल के समान (समतल वृत्ताकार) है तो हर स्थान से
सूर्य एक ही दिशा में एक साथ दीखेगा। यदि ऐसा है तो उत्तर मेरू में देवता
लोग ६ मास तक सूर्य को देख पाते हैं। उसी प्रकार अन्य स्थानों पर भी सूर्य
सदा क्यों नहीं दीखता है?
यदि निशा जनकः कनका चलः किमु तदन्तरगः सनदृश्यते
उदगयन्ननु मेरु रथांशुमान् कथमुदेति च दक्षिण भाग के। १९.।
यदि कनक गिरि रात्रि का कारण है, तो वह रात में क्यों नहीं दीखता, एक
तरफ सूर्य रहने के कारण वह चकाचक दीखता। मेरू यदि सिर्फ उत्तर में हो तो
उत्तर में ही सदा सूर्य का उदय होता, दक्षिण में क्यों होता है?
समोयतः स्यात्परिधेः शतांश पृथ्वी च पृथ्वी नितरां तनीयान्
नरश्च तत्पृष्ठ गतस्य कृत्स्ना समेव तस्य प्रतिभात्यतः सा। २०।
वृत्त की परिधि का १०० वां अंश सरल ही दीखता है। पृथ्वी की तुलना में
मनुष्य बहुत छोटा होने के कारण वह गोल पृथ्वी का और भी बहुत छोटा अंश
देख पाता है। अतः मनुष्य को गोल पृथ्वी भी समतल दीखती है।
पुरान्तरं चेदिद मुत्तरं स्यात् तदक्ष विश्लेष लवैस्तदा किम्
चक्रांशकै रित्यनुपातयत्या युक्तं निरुक्तं परिधेः प्रमाणाम्। २१।
विषुव के उत्तर दो नगर (उत्तर दक्षिण रेखा पर) का अक्षांश निकालें। दोनों
का उत्तर दक्षिण दिशा में योजन अन्तर भी निकालें। अक्षांश अन्तर का योजन
मालूम होने पर ३६० का योजन अन्तर अनुपात से निकालने पर पृथ्वी की परिधि
का परिमाण होगा।
निरक्ष देशात् क्षिति षोड़शांशे भवेदवन्ती गणितेन यस्मात्
तदन्तरं षोड़श संगुणं स्या भूमानमस्मात् बहु किंतदुक्तम्। इति। २२।
विषुव से अवन्ती नगरी पृथ्वी परिधि के १/१६ भाग की दूरी पर स्थित है।
इस अन्तर को १६ से गुणा करने पर भी पृथ्वी की परिधि का परिणाम आता है
। पृथ्वी की गोलाकार और परिधि के बारे में इससे अधिक स्पष्ट और क्या कहा
जा सकता है? (उद्धरण समाप्त)