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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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२५६ सिद्धान्त दर्पण
आपके अनुसार सत्य है या मिथ्या है ?
पूर्वस्यां पश्चिमास्यांञ्च प्रायशः शशिनो दिशि
उन्नतिः सौम्य श्रृंगस्य दृश्यते भारते कथम् । ७२ ।
भारत में चन्द्र का उत्तर श्रृंग ही सदा उन्नत दीखता है - चन्द्र पूर्व या पश्चिम
किसी भी दिशा में हो इसका क्या कारण है ?
रवीन्दु मार्गयो भूरि विप्रकर्षात् कथं भवेत्
भू पृष्ठ क्रान्ति साम्योत्तर पाते दृष्टि संगतिः । ७३ ।
रवि और चन्द्र परस्पर बहुत दूर हैं । तथापि उनकी क्रान्ति समान होने पर
(वैधृति और व्यतीपात) महापात में उनक्री दृष्टि का संयोग किस प्रकार होता है ?
किं भ्रमन्ति न वा लोकाः प्रवहान्महिरादयः ।
दिनाब्द मास होराणा मधिपानां क्रमश्च कः । ७४ ।
क्या महः तप आदि लोक भी प्रवह वायु द्वारा घूमते हैं ? दिन, वर्ष, मास
और होरा के स्वामी किस क्रम से होते हैं ?
स्यातां भानोः यदि दिन निशेदर्शना दर्शनाभ्याम्
नाड़ी षष्ठ्यां द्युति शमवनौ युक्त मासीत्त दानः ।
पैत्रं मासा किमु शशिभुवा दैवमर्काब्दतः किम्
ब्राह्मम्यं खाभ्रात्म भुजमितै (२,०००) किंयुगै स्यात्तदेवः । ७५ ।
सूर्य के दर्शन और अदर्शन (उदय) और अस्त) क्रम से दिन और रात होने
से ६० दिन का अहोरात्र समझ में आता है । पर चन्द्र मास में पितृ दिन, सौर
वर्ष में देवताओं का दिन रात तथा २००० महायुग में ब्रह्मा का दिन रात कैसे
होता है ?
कतिविधः प्रलयः कतिधाः समाः समय बोधक यन्त्र महो कथम् ।
नभसि भ ग्रह भांश कला मितौ भवति किं करणं भवदी पितम् । ७६ ।
प्रलय कितने प्रकार और वर्ष कितने प्रकार का है ? काल मापने का यन्त्र
कैसा होता है । आकाश गोल में नक्षत्र और ग्रह का राशि, अंश और कला मान
आपके अनुसार किस प्रकार निकाला जाता है (वेध द्वारा)?
षड् ऋतवः प्रभवन्ति कथं क्षि तौ
किमु समा न समाः किमु सर्वतः
उपकृतिःभंगणा जगतोऽस्तिका
जगदिदं गमनादिति नास्ति काः । ७७ ।
पृथ्वी पर शिशिर आदि ६ ऋतु किस प्रकार होते हैं ? (सौर, चान्द्र, सावन
आदि) वर्षों का परिमाण क्या समान होता है ? ग्रह भगण या नक्षत्र से क्या
संसार का कुछ लाभ होता है ? गच्छति इति जगत् , अर्थात् जगत का अर्थ गति