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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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प्रश्न वर्णनम् २५३
पदकानां कथं सृष्टिः खेटनान्तु स्फुटीकृतिः
भूमावेव समाकिंवा यत्र कुत्रापि सा भवेत् । ५० ।
अहर्गण आदि के पदक आपने क्यों (कैसे) बनाया ? ग्रहों के स्फुटीकरण के
लिए इतना प्रपञ्च क्यों ? ग्रहों की यह स्फुटता केवल पृथ्वी के लिये है या अन्य
ग्रहों से भी इसी रीति से अन्य ग्रह स्फुट होंगे ?
पूर्वोक्तं कुजादीनां सिद्धौ कर्म चतुष्टयम्
अधिकम् यत्वयोक्तं तत् किं नाम ज्ञार्कि भू भुवाम् । २१ ।
प्राचीन आचार्यों ने मंगल आदि ग्रहों को स्फुट करने के लिये चार प्रकार के
संस्कार कहे हैं । आपने बुध, शनि और मंगल को स्फुट करने के लिए जो
अतिरिक्त संस्कार दिया उसका क्या कारण है ।
सम्भवः परिधीनां स्याद् कथं द्राङ् मन्द जन्मनाम्
वैषम्यं स्यादत् कथं तेषा मोज युग्म पदान्तयोः । ५२।
शीघ्र और मन्द परिधि की कल्पना क्यों ? ओज (विषम) और युग्म (सम)
पदों में वे समान क्यों नहीं होते ?
केन्द्र भ्रमः कथं बाहोः फलं मेष तुलादिकम् ।
धनर्णारूयं कथं भुक्तेः कर्कि नक्रादिजं तथा । ५३ ।
मन्द और शीघ्र केन्द्र का भ्रमण किस प्रकार होता है ? मेषादि और तुलादि
केन्द्र में मन्द और शीघ्र फल क्रमशः धनं और ऋण क्यों होता है ? कर्क आदि
तथा मकर आदि केन्द्र में ग्रह गति फल क्रमश धन या ऋण क्यों होता है ।
सिद्धांश (२४) सम्मिता क्रान्तिः सिद्धान्तेष्वखिलेष्वपि
त्योक्तार्द्धशं हीना कि सौम्य याम्येऽपमेकथम् । ५४ ।
सभी सिद्धान्तों में परम क्रान्ति २४ अंश माना गया है । आपने इसे २३ अंश
क्यों माना है । क्रान्ति उत्तर और दक्षिण क्यों होता है ?
क्षय वृद्धि विपर्यासो दिन रात्र्य र्भवेद भुवि
क्रान्ति वृत्तस्थ राशीनामुदया न समकृतः । ५५ ।
पृथ्वी पर दिन और रात का मान घटता बढ़ता क्यों है ? सभी राशि तो क्रान्ति
वृत्त में ही है, उनका उदयमान समान क्यों नहीं है ?
तप्तौ दुःसहं किं स्यादातपः शिशिरे सुख
ग्रीष्मान्ते किंम्प्रवर्षन्ति न्यान्यत्तौ किं तथा घनाः । ५६ ।
सूर्य किरण ग्रीष्म ऋतु में दुःसह तथा शिशिर में सुखकर क्यों है ? ग्रीष्म
ऋतु के अन्त में मेघ अधिक वर्षा करते हैं, अन्य ऋतुओं में क्यों नहीं ?