सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 349, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ें२५२ सिद्धान्त दर्पण
व्याख्या ठीक है ? ग्रहों की सृष्टि का क्रम क्या है ? पृथ्वी का रचना किस प्रकार
हुयी ?
किमाकारा किमाधारां सा धरा कवि सागरा
द्वीपैर्धराधैर्य्याप्ता कथं कति निराश्रिता । ४३ ।
पृथ्वी का आकार और आधार कहिये । पृथ्वी पर कितने, समुद्र, द्वीप तथा
पर्वत है ? इस पर कितने लोग निवास करते हैं ?
कियन्तौ परि धिव्यासौ किं फलं पृष्ठजं घनम्
उर्ध्वाधरस्थ लोकानां ज्योतिषां कीदृशी स्थितिः । ४४ ।
पृथ्वी का परिधि, व्यास, पृष्ठ (क्षेत्रफल) और घनफल (आयतन) कहिये ।
पृथ्वी पर उर्ध्वाधर भाव से लोक तथा ग्रह, नक्षत्र आदि कैसे स्थित हैं ?
चेतना चेतनावासो यथा भू पृष्ठ गर्भयोः
चन्द्र भौमादि बिम्बेषु तथास्ते किं न वा स्थितिः । ४५ ।
पृथ्वी पृष्ठ और गर्भ में किस प्रकार चेतन और अचेतन प्राणी रहते हैं ? क्या
चन्द्र और मंगल आदि ग्रहों के बिम्ब पर भी उसी प्रकार प्राणी निवास करते हैं ?
ग्रहाणां कल्प भगणा ये सिद्धान्तेषु कीर्तिताः
तेषां दृक् सिद्धि राहित्या दार्य्य भटादिभिःपुनः । ४६ ।
प्राचीन सिद्धान्तों में ग्रहों का कल्प भगण ठीक नहीं होने के कारण (दृक्
सिद्ध नहीं होने से) आर्य भट्ट आदि ने पुनः-
कल्पिता दृक् समाह्येते भास्कराद्यैर्निराकृताः
तैर्ये स्थिरा कृतास्तेभ्यो भगणा भगदीरिताः । ४७ ।
अन्य दृक् सिद्ध भगणों की कल्पना की । भास्कर आदि आचार्यों ने पुनः
इनको अस्वीकार कर अपने स्वतन्त्र भगण निर्धारित किये ।
विषमाश्चेत्तदामीषां स्थैर्यं किं मानमुच्यताम्
विपर्येष्यन्ति चेदेते तवित्रो का गतिस्तदा । ४८ ।
फिर आपका भगण भी भास्कर से अलग है । इससे लगता है कि भगण
स्थिर नहीं है । इस अवस्था में आपके भगण की क्या गति होगी- क्या उसे भी
कोई काट देगा ?
यदि संवत्सराः षष्टि मध्ये ज्ये गृह भोगजाः
तदास्तस्मिन्नजादिस्थे कथं न प्रभवादयः । ४९ ।
यदि मध्यम गुरु के राशि भोग से ६० संवत्सरों की उत्पत्ति होती है, तो मध्यम
गुरु मेषादि में रहने पर संवत्सर प्रभव से (१ म) क्यों नहीं आरम्भ होता है ।