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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 348, कुल 609 में से

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पृष्ठ 348

:
साम्प्रतं भवता सोक्ता सूर्या विभ्रमकारिणः
Wait, is it "सूर्या" or "सूर्यो"?
Look at line 20:
स ू र् या -> wait, it has a vertical line after 'र्'?
Wait, look at 'सूर्या':
There is 'सू', then 'र्' on 'य', and then a vertical line 'ा': 'सूर्या'!
Wait, is it 'सूर्या' or 'सूर्यो'?
There is NO top stroke for 'ो'! It is just a vertical line: 'सूर्या'!
Wait, look at line 20:
साम्प्रतं भवता सोक्ता सूर्या विभ्रमकारिणः

Line 21:
ग्रहै स्वेन परीतास्थे भ्रमता विधु नेति च । ४० ।
Wait, look at:
ग्रहै स्वेन परीतास्थे or परीतास्ते?
Look at the letter: 'स्' followed by 'थ' or 'त'?
It has a loop: 'थे' or 'ते'?
Look at 'स्थे' in 'इति स्थिते' (line 4): 'स्थि' has a loop.
Here in 'परीतास्ते' or 'परीतास्थे':
It looks like 'स्' and 'थे' or 'ते'?
Wait, in line 27: 'त्वत् तस्तु': 'स्तु' has 'स्