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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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२४८ सिद्धान्त दर्पण
शास्त्रीय वर्णन हो गया है ।
निवासाय पुरा स्माकं सृष्टाया विष्णुनाधरा
युज्यते प्रथमं तस्याः स्वरूपं परिशीलितुम् । १५ ।
बहुत पहले सृष्टि के आरम्भ में विधाता ने हम लोगों के लिए इस पृथ्वी को
बनाया । पहले मुझे इसी का स्वरूप समझाइये ।
गोलं ज्ञात्वा ततस्तस्मिन्निः सन्देहं नमः सदाम्
गणितस्यानुभूतिर्मे भूयाद् भवद नुग्रहात् । १६ ।
उसके बाद आपकी कृपा से मेरा खगोल और ग्रह गणित का वास्तविक
अनुभव हो सकता है ।
चक्राकारां वसुमतीं कथयन्ति पुराविदः
धृतां क्रीड़ा हि कूर्माद्यैः पञ्चाशत् कोटि योजनम् । १७ ।
पुराणों में पृथ्वी का आकार चक्र के समान कहा गया है । इस पृथ्वी को
पुनः वराह, सर्प, (शेषनाग) और कच्छप आदि ने धारण किया है । पृथ्वी का
विस्तार ५० कोटियोजन है (क्षेत्रफल)
तन्मध्ये जाम्बवो द्वीपो लक्षयोजन विस्तृतः
तावता लवणोदेने वेष्टिता नवर्ष भृत् । १८ ।
इसके बीच में १ लाख योजन विस्तार (क्षेत्रफल) का जम्बू द्वीप है । जो चारों
तरफ लवण समुद्र से घिरा है ।
मध्येतस्यस्थितो मेरु ख खाब्ध्यष्ट (८४,०००) योजनैः
सच्छितो भू प्रविष्टोऽसौ खा प्राप्तांगेन्दु (१६,०००) योजनैः । १९ ।
जम्बू द्वीप के मध्य में (८४,०००) योजन लम्बा मेरु पर्वत है । (ऊंचाई) मेरु
का १६००० योजन भूगर्भ में है ।
जम्बू द्वीपाद् बहि द्वीपाः परितः स्व समैर्वृताः
सिन्धुभिस्ते पुराणोक्ताः क्रमद्विगुण विस्तृताः । २० ।
जम्बू द्वीप के बाहर क्रमशः दो गुणा विस्तृत अन्य द्वीप है तथा उनको भी
समुद्र घेरे हुए हैं ।
प्रान्तस्थ पुष्कर द्वीप मध्यगे वलयो कृतौ
भ्रमत्यर्क रथायुद्धं मानसोत्तर पर्वते । २१ ।
अन्त में स्थित पुष्कर द्वीप के मध्य भाग में वलय के आकार का मानसोत्तर
पर्वत है जिसके ऊपर सूर्य का रथ भ्रमण करता है ।
द्वीपाब्धीनां बहिः स्वर्ण भूलोका लोक पर्वतौ ।
गर्भादस्तद् बहि ब्रह्म कटाहक्ष्मादि भिर्वृतः । २२ ।