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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 342, कुल 609 में से

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षोडशः प्रकाशः
गोलाधिकारः
प्रश्न वर्णनम्
यत्पादाम्बुरुह प्रसक्त हृदया ब्रह्मादयोऽनास्थया
कालेऽन्यत्र च नेत्र साम्य विरहात्तत्र द्विरागायवा
शिष्य प्रश्न वशात्च सूक्ष्मवचसा सिद्धान्त जातं जगुः ।
सर्वज्ञा अपि मादृशा इव नम स्तस्मै जगत्स्वा मिने । १ ।
जिनके चरण कमलों में ध्यान रख कर ब्रह्मा वशिष्ठ आदि ज्ञानियों ने समय
समय पर पहले के सिद्धान्तों में त्रुटि दीखने से उत्पन्न अनास्था के कारण नये
सिद्धान्त ग्रन्थों की रचना की एवं शिष्यों के प्रश्नों का सूक्ष्म विश्लेषण कर उत्तर
दिया तथा सर्वज्ञ होने पर भी मेरे (सामन्त चन्द्रशेखर की) भांति छोटे छोटे सिद्धान्त
ग्रन्थ लिखे, उसी जगत के स्वामी महाप्रभु जगन्नाथ की वन्दना करता हूँ ।
यश्चक्षुर्ग्रहपति मोऽपि गगने गृह्णन् ग्रहाणां गणं
भूगोलं परि गच्छति ग्रहपतिः सर्वाग्रिमो मध्यमः
लोका लोक विशोक तावन कृते स्पष्ट स्त्रयो मूर्त्तिमान्
यश्चक्षु