सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहापात वर्णन २४१
ये प्रोक्ताः सदसत्फलाय जगतः श्री व्यास पित्रादि भो
राजाद्या जलदाः सदादिपतयो भागाः सुयोगादयः
भावाभाव जुषा नदृष्टवशतः तत् तत् फलानां मया
कादीचित्कतया नतेत्र गदिता स्त्यक्ताश्च सिद्धान्तिभिः । ६१ ।
पराशर आदि ऋषियों ने जगत के शुभ अशुभ फल के लिये राजा, मन्त्री और
पालक, द्रोण और पुष्कर आदि मेघ, आटका धिपति, अग्नि, वर्षा और व्याधि
आदि का भाग, राज योग और अधिराज योग आदि का वर्णन किया है । ये सब
कभी कभी वर्णित फल देते हैं । कभी नहीं भी देते हैं । यह सोचकर मैने इनके
विषय में नहीं लिखा है । अन्य सिद्धान्त ग्रन्थों में भी इनके बारे में नहीं लिखा
है ।
यत्सूर्येन्दो र्भगण विरतिः स्याद् युगे तत् कृतां (४) शे
निःशेषत्वं क्षिति दिनततो द्वापरान्त प्रसिद्धाः
सृष्टे रब्दायुगकृत (४) लवे (१०,८०,०००) नोद्धताः शेष शून्याः
स्तस्मात् नोक्त स्तपन शशिनो द्वापरान्त ध्रुवोऽत्र । ६२ ।
प्रति महायुग के अन्त में सूर्य और चन्द्र का भगण पूर्ण होता है । इस महायुग
के १/४ अंश (१०,८०,०००) वर्ष में भी सावन अहर्गण पूर्ण होता है । महायुग के
एक पाद में) इनकी ( सावन अहर्गण की) संख्या (३९,४४,७९,४५७) है । द्वापर
अन्त तक बीते सृष्ट्यब्द (१,९५,५८,८०,०००) को (१०,८०,०००) से भाग देने पर
लब्धि (१८११) तथा शेष शून्य होता है । इस कारण द्वापर अन्त में रवि और चन्द्र
का ध्रुव कहने की आवश्यकता नहीं है ।
सृष्ट्यब्दानां कलि गत समानां दिनौघ सुमेलः
स्यान्मध्यार्क क्रिय मुख गतावत्र तत् पूर्वघस्रे,
चैत्राद्युक्ता दिनगतियुता स्वे ध्रुवाः पञ्जिकादौ
सौरे तुल्याः करण शरदां तद्दिनां गार (३) वारात् । ६३ ।
मध्य सूर्य मेष आदि में प्रवेश करने के समय (उस दिन का) सृष्टि आरम्भ
से द्वापर अन्त तक गत वर्ष (१,९५,५८,८०,०००) एवं कलि गत वर्ष (४९७०)
(१८६८ ई. करणाब्द) का अहर्गण क्रमशः (७,१४,४०,२२,९६,६२७) तथा
(१८,१५,३३४) है । दोनों की वार शुद्धि ठीक है ।
करणाब्द के आरम्भ में मध्यम रवि मेष मे प्रवेश करने के पहले दिन मध्यम
मान से चैत्र शुक्ल प्रति पदा था । उस दिन का जो ध्रुव आदि कहा गया है ।
उसमें (ग्रह की दैनिक गति) जोड़ने से पञ्जिका में वह सूर्य सिद्धान्त के अनुसार
मध्यम ग्रह का ध्रुव होगा । करणाब्द अहर्गण का वार आदि मंगल वार से आरम्भ
होगा ।