सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 332, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहापात वर्णन २३५
रवि, चन्द्र का पात और शर निकाल कर रवि और चन्द्र की स्फुट क्रान्ति का
अन्तर निकालेंगे ।
तदा प्राक् कालतः चेत् स्याद् गतैष्यत्व विपर्ययः
तदात् षष्टि दण्डान्त मध्यं पातस्य सम्भवेत् । २६ ।
इस समय यदि पहले गये समय से पात (गत या गम्य) से उल्टा दीखे (गम्य
या गत) तो उक्त (६०) दण्ड में स्फुट क्रान्ति समान होगी ।
यदा गतस्य गतता गम्यता च भविष्यतिः
तदादूरे भवेद् योगान्तु तद्दिवसान्तरा । २७ ।
पर यदि पूर्व समय का गत या गम्य पात ठीक उसी प्रकार गत या गम्य ही
देखा जाय तो पात उक्त ६० दण्ड के बाद होगा । ६० दण्ड के दिन के भी तर
नहीं होगा ।
तत् सिद्धये गतिः साध्या याम्य सौम्यापमोद् भवा
प्राक् पश्चात् कालयोः पात यातैष्य त्व विपर्यये । २८ ।
योग सिद्धि के लिए रवि और चन्द्र की क्रान्ति का अन्तर निकालेंगे । चक्र
और चक्रार्द्ध समीकरण काल के पूर्व और पर काल के पात की पत और गम्यता
के विपरीत होने पर समीकरण काल का
तत्क्रान्त्यन्तरयो र्योगस्त्यागस्तद विपर्यये
भवेत्क्रान्ति गति साध्या पातार्थं कलिकात्मिका । २९ ।
क्रान्ति का अन्तर और ६० घटिका संस्कृत समीकरण कालिक क्रान्ति अन्तर-
इस प्रकार दो क्रान्ति अन्तरों का योग करेंगे । गति और गम्यता उल्टा नहीं होने
पर दोनों क्रान्ति अन्तरों का अन्तर करेंगे । पात निकालने के लिए यह कलात्मक
मान प्रथम क्रान्ति गति होगी ।
आद्य क्रान्त्यन्तर कलाः षष्टिघ्ना गति भाजिताः
फलं नाड्यादि संस्कार्यः काले समकालोद् भवे । ३० ।
प्रथम क्रान्ति अन्तर कला को ६० से गुणा कर प्रथम क्रान्ति गति से भाग देने
पर जो लब्धि होगी उसको समीकरण काल में पात होने वाला (गम्य) हो तो योग
करेंगे । यदि पात बीत चुका हो (गत) तो समीकरण समय से उसे घटायेंगे ।
गतैष्यता वशाद् भूयस्तत्काल क्रान्तितः पुनः
साध्यं क्रान्त्यन्तरं प्राग् वद् गतैष्यत्वाद् गतेः कलाः । ३१ ।
पात की तात्कालिक गत या गम्यता के अनुसार इष्ट काल में पुनः रवि चन्द्र
और क्रान्ति द्वारा पहले की तरह क्रान्ति अन्तर का साधन करेंगे । और पहले की
तरह क्रान्ति गति कला निकालेंगे-यह द्वितीय क्रान्ति गति होगी ।