सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 328, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंपञ्चदश प्रकाश
महापात वर्णन
यात्रादीनां शुभ फलं मलं कर्मणा सकृतानां
यस्मिन् भस्मी भवति गण का यत्र मुह्यन्ति भूयः
तं योगेन्द्रं विवरण जयाद्येषु सूर्योपराग
प्रख्यं वक्ष्याम्यह मिह महापात मातत्य तत्त्वात् । १ ।
सज्जनों के यात्रा, उपनयन, विवाह आदि के शुभ कर्म जिस महापात के
कारण भस्म हो जाते हैं, जिस महापात की चर्चा में सिद्धान्ती लोग भी भ्रमित हो
जाते हैं, और जिस महापात में योग में दान, जप और स्नान आदि का फल सूर्य,
ग्रहण के समान ही शुभ होता है । उसी महापात का वर्णन मैं विभिन्न शास्त्रों
के अनुसार कर रहा हूँ ।
वैधृत्य व्यतिपाताख्यौ भेद्यौ पातस्य कीर्त्तितौ
गोलायन क्रान्ति भेद सम्भवौ रवि चन्द्रयोः । २ ।
पाद दो प्रकार के हैं- वैधृति और व्यतीपात । सूर्य और चन्द्र दोनों की क्रान्ति
बराबर होने पर पात होता है । एक ही अयन में रहने पर (भिन्न गोल में) वैधृति
योग तथा भिन्न अयन और एक गोल में रहने पर व्यतीसपात होता है ।
स्याद् गोल सन्धिरर्केन्दो र्विषुवद् वलयस्थयोः
सन्धि रायन एव स्यात् परमापक्रम स्थयोः । ३ ।
रवि और चन्द्र विषुव वृत्त (बृहत् अहोरात्र वृत्त) में रहने पर दोनों की गोल
सन्धि होती है । दोनों परम क्रांति के स्थान पर रहने से उनकी अयन सन्धि होती
है ।
क्रान्ति साम्यं यदा भिन्नायनयोः एव गोलयोः ।
योगः स्याद् व्यति पातारूयं तदा चन्द्रविवस्वतोः । ४ ।
रवि और चन्द्र एक गोल तथा भिन्न अयन में रहने पर जब दोनों की क्रान्ति
बराबर हो तो व्यतीपात योग होता है ।
विभिन्न गोल यो रेकायनयोः क्रान्ति तुल्यता
यदा तदा वैधृतारूयः सम्भवेद् दृष्टि योगजः । ५ ।
रवि और चन्द्र भिन्न गोल में पर एक ही अयन में हों और क्रान्ति बराबर हो
तो वैधृति योग होता है । क्रान्ति समान होने पर परस्पर दृष्टि योग होता है ।
सूर्य सिद्धान्ते-तुल्यांशु जाल सम्पर्का त्तयस्तु प्रवाहाहतः
तद् दृक् क्षेपोद् भवो वह्नि लोका भावाय जायते । ६ ।
(सूर्य सिद्धान्त में) रवि और चन्द्र दोनों की समान क्रान्ति होने पर उनकी