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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 318

चन्द्र शृङ्गोन्नति वर्णनम् २२१
इसके बाद चन्द्र का आयन और आक्ष दृक् कर्म बार-बार करना होगा नहीं
तो स्फुट चन्द्र और उसके पात के बीच की दूरी के कारण शर में भिन्नता होगी।
तदन्तरोत्थ प्राणेषु स्थिरे ष्वित्थं विधोः पुनः
नतिं वित्रिभ लग्नोत्थां स्फुटेषु दृष्टि कर्मणो । ८ ।
इस प्रकार रवि और चन्द्र का अन्तर असु स्थिर होने पर चन्द्र से तीन राशि
घटाकर उसका (वित्रिभ लग्न का) नत और शर निकाल कर उसका आयन और
आक्ष दृक् कर्म करेंगे।
कुर्यात् स्पष्ट गतीन्द्रां (१४) शस्त्रिज्याघ्नो लम्बयोद् धृतः
प्राणात्मक स्तदूनाः स्युर्दृक् सिद्धास्तेऽन्तरासवः । ९ ।
इसको पुनः सूक्ष्म करने के लिये ६ राशि युक्त रवि तथा चन्द्र में इसे जोड़कर
दोनों का अन्तर असु निकालेंगे। चन्द्र की स्फुट गति के १/१४ को त्रिज्या से गुणा
कर लम्बज्या से भाग देने पर चन्द्र का परम लम्बन असु आयेगा। इसे पहले
निकाले गये अन्तर से घटाने पर दृक् सिद्ध अन्तर असु होगा।
तैः प्राणैरस्त मेतीन्दूः शुक्रेऽर्कास्त मयात्परम्।
अत्रार्क सावनत्वं हि द्वयो स्तात्कालिकी कृतौ । १० ।
सूर्यास्त के इतने समय बाद चन्द्र का अस्त होगा। रवि और चन्द्र को
तात्कालिक करते समय असु को सावन तथा
तत्कृतौ केवल स्येन्दोः प्राणानामाक्षैता मंंता
सूर्यास्त कालिकौ तौ चेद् ग्राह्यौ ते चन्द्र सावना । ११ ।
केवल चन्द्र को तात्कालिक करते समय असु को नाक्षत्र (अर्थात् नाक्षत्र दिन
का २१,६०० भाग) मेरे मत के अनुसार माना जायेगा। सूर्यास्त काल में रवि और
चन्द्र निकालने के समय असु चन्द्र सावन (दिन का २१,६५९ भाग) होगा।
भगणार्द्धं रवे दत्वा कार्यास्थद् विवरासवः
तैः प्राणैः कृष्ण पक्षेतु शीतांशु रुदयं ब्रजेत् । १२ ।
कृष्ण पक्ष में सूर्यास्त कालिक रवि का साधन कर उसमें ६ राशि जोड़ेगे।
इस रवि और चन्द्र का अन्तर असु निकालेंगे। सूर्यास्त के इतने असु आदि समय
बाद चन्द्र उदय होगा।
अत्राप्यर्कास्त कालोत्थौ रवीन्दुदृक् क्रिये विधोः
उदयेल्लम्बना सूनां धनत्वं स्थिरतोक्तवत् । १३ ।
यहां भी सूर्यास्त समय के रवि और चन्द्र दोनों का दृक् कर्म संस्कार करना
पड़ेगा। उदय के समय लम्बन असु जोड़ना होगा और बार बार यह किया कर
रवि और चन्द्र के अन्तर असु का मान स्थिर करेंगे।