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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 317, कुल 609 में से

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पृष्ठ 317

चतुर्दश प्रकाश
चन्द्र शृङ्गोन्नति वर्णनम्
शृङ्गोन्नतिं विधोर्वक्ष्ये सनित्यास्त मतयोदयाम् ।
दृक् सिद्धां वासनावद्भिः सबोधां छेदकान्विताम् । १ ।
सूक्ष्म ज्ञानियो के बोध के लिए चन्द्रमा के स्फुट दैनिक उदय अस्त, शृंगोन्नति
तथा परिलेख के बारे में कह रहा हूँ।
उदयास्त मयौ नित्या वानेयौ प्रथमं विधोः ।
दृक् कर्म द्वय संस्कार स्पष्ट सूक्ष्मेन्दु भास्वताः । २ ।
सूर्यास्त के कितने समय बार चन्द्रास्त होगा यह निकालने की विधि-पहले
चन्द्रमा का उदय और अस्तकाल निकालना चाहिये । सूर्यास्त समय में सूक्ष्म चन्द्र
और स्फुट रवि का साधन कर उन्हें सायन कर दृक् कर्म संस्कार करेंगे ।
अयनांशैः संस्कृतयोः सूर्यास्त समयोत्थयोः
सषड् भयोः काल लवाः साध्या लग्नान्तरासुभिः । ३ ।
सायन और दृक् कर्म संस्कृत सूर्यास्त कालीन रवि और चन्द्र में ६ राशि
जोड़कर उनके लग्न अन्तर असु से कालांश का साधन करेंगे ।
तयोरूनस्य भोग्यासून भुक्तासनधिकस्य च ।
तदन्तरोत्य लग्ना सून् संयोज्याभ्र रसो (६०) द् धृतेः । ४ ।
रवि और चन्द्र में जिसकी राशि आदि कम है उसका भोग्य असु, अधिक
राशि वाले का भुक्त असु तथा मध्यवर्ती राशियों के उदय असु जोड़कर ६० से
भाग देंगे ।
स्युः स्फुटान्तर कालांश रसा (६) प्ता घटिकादयः
तन्नाड़िका हते भुक्ति रवीन्दोः षष्टि भाजिते । ५ ।
फल रवि और चन्द्र का स्फुट अन्तर कालांश होगा । इसे ६ से भाग देने पर
घटी आदि फल होगा जिसमें रवि और चन्द्र की गति से गुणा कर ६० से भाग
देंगे ।
तत्फलान्वितयो र्भूयः कर्तव्या विवरासवः
असकृत् कर्म भिस्तेतु स्थिराः स्युरवि चन्द्रयोः । ६ ।
कलादि फल को रवि और चन्द्र में जोड़ने से जो रवि और चन्द्र होगा पुनः
उनका अन्तर असु निकालेंगे । ऐसा बारबार करने से रवि और चन्द्र का अन्तर
असु स्थिर होगा ।
अत्र चन्द्रस्य दृक् कर्म द्वय कार्यं पुनः पुनः
यतः स्फुटेन्दोः पातस्य भेदाद् विक्षेप भिन्नता । ७ ।