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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 314

ग्रहर्क्षोदयास्तसमय वर्णनम् २१७
स्फुट खेटार्क योर्यत्र समये समता तदा ।
स्फुटं चक्रं कुजादीनां चक्रार्द्धं च सितज्ञयोः । ७६ ।
स्फुट सूर्य और स्फुट ग्रह की राशि जब समान हो तब मंगल आदि ५ ग्रहों
का चक्र काल तथा बुध शुक्र का चक्रार्द्ध (भी) होता है ।
साय्नार्क स्य यद्राशौ ये ये स्वास्तो दयांशकाः
कथितास्ते तदात्वार्क ग्रह गत्यन्तरोद् धृताः । ७७ ।
चक्र और चक्रार्द्ध समय से बिना दृक् कर्म संस्कार के अस्तोदय काल
निकालने की विधि - उत्कल के लिए सायन संस्कृत रवि की राशि अनुसार ग्रहों
का उदय और असतांश कहा गया है । ग्रहों के चक्र काल और बुध और शुक्र
के चक्रार्द्ध काल में उस अस्तोदयांश में रवि और ग्रह की गति अन्तर से भाग
देंगे ।
चक्रज्ञसित गत्यर्क गति योग विभाजिताः ।
दिनादिभिः फलैः पूर्वं मस्तं पश्चात्तथोदयः । ७८ ।
बुध और शुक्र के लिये उनके और रवि के गति योग से भाग देंगे । फल
का मान दिन आदि में होगा । इतने दिन आदि समय चक्र और चक्रार्द्ध समय
के पहले तक ग्रहों का अदर्शन तथा उसके बाद दर्शन होगा ।
चक्र चक्रार्द्ध कालः स्यात् पुनस्तात्का लिकार्कतः ।
सायना दुदयास्तांशाः लिप्ताः प्राग्वद् हृताः फलैः । ७९ ।
इस प्रकार जो उदय और अस्त समय आयेगा उसको पुनः चक्र और चक्रार्द्ध
काल कहा जायेगा ।
उदय अस्त कालीन सायन सूर्य से उदय और अस्त अंश आदि आयेगा ।
उसको पहले की तरह रवि और गति अन्तर से भाग देंगे । (बुध और शुक्र के
लिए गति योग से भाग देंगे) फल का मान दिन आदि में होगा ।
दिनाद्यैरस्त मुदयं कृत्वा तत्काल जां गतिम्
चक्र चक्रार्द्ध जां त्यक्त्वा तद्यो गार्द्ध ग्रहार्कयोः । ८० ।
चक्र या चक्रार्द्ध समय से इतने दिन आदि पहले तक ग्रह अस्त रहेगा, उसके
बाद उदय होगा । इस शोधित उदयास्त काल में ग्रह और रवि की गति निकाल
कर उनका योग आधा करेंगे ।
कर्मयोग्या स्फुट गतिः स्यात्ततः पूर्ववद्दिनैः ।
प्राक् पश्चादागतौ कालौ स्यात् वास्तोदय स्फुटौ । ८१ ।
ग्रह और रवि की गति के योग का आधा ही उदय और अस्त काल के
साधन के लिये ग्रह और रवि दोनों की स्फुट गति मानी जायेगी । तात्कालिक
सायन और ध्रुवार्द्ध संस्कृत रवि की राशि के अनुसार जितनी उदय और अस्त