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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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ग्रहर्क्षोदयास्तसमय वर्णनम् २११
पश्चाद् द्यूनोदय प्राणैर्भक्ताः क्षेत्रांशका मताः
दृक् कर्मज ध्रुवस्तैस्तु प्राक् प्रतीच्यो र्युतोज्झितः । ३९ ।
पश्चिम में रहने पर अपनी राशि के उदयासु से भाग देते हैं । लब्धि क्रान्ति
वृत्तीय क्षेत्रांश होगा । पहले निकाला गया दृक् कर्म ध्रुव पूर्व या पश्चिम में होने
से इस क्षेत्रांश को क्रमानुसार उसमें जोड़ेगे या घटायेंगे ।
भवेत् भयोगताराणां मुदयास्त मयध्रुवः
स्फुटार्कै तत्समेतेषा मुदयोऽस्त मयस्तथा । ४० ।
यह नक्षत्र योगतारा का उदय अस्त ध्रुव होगा । स्फुट सूर्य और तारा का
उदय या अस्त ध्रुव समान होने पर वह नक्षत्र सूर्य सान्निध्य (निकटता) के कारण
उदय या अस्त होगा ।
उदक् स्थानामस्त मया पूर्वे सोदय सम्भवात् ।
नेष्टेऽप्यस्तमय स्तत्काल ज्ञानाय केवलम् । ४१ ।
उत्तर दिशा में स्थित कई नक्षत्रों का पश्चिम में अस्त होने के पहले पुनः पूर्व
में उदय हो जाता है । अतः उनके अस्त के बारे में चर्चा आवश्यक नहीं है ।
फिर भी कभी कभी उनका अस्त हो सकता है, इसके समय के ज्ञान के लिये ही
उनकी चर्चा हुयी है ।
क्रत्वा दिना मन्यभानां, साध्यावस्त मयोदयौ
कुम्भोद्भव यमादीनां याम्या नामास्त भूरिता । ४२ ।
क्रतु आदि कितने नक्षत्रों का उदय और अस्त साधन करना चाहिये । अगस्त्य
और यम आदि कई नक्षत्र बहुत दक्षिण होने के कारण वे बहुत दिन तक अस्त
रहते हैं ।
सर्वेषान्तु ग्रहर्क्षाणां दिनमान प्रबोधतः
तौ ज्ञेयावपि दाढ्यार्थं कृतोगणित विस्तरः । ४३ ।
अपने अपने क्रान्ति के अनुसार चर निकालकर प्रत्येक ग्रह का दिनमान
निकाला जा सकता है । अतः उनका नित्य उदय और अस्त आसानी से मालूम
हो जायेगा । तथापि उदय और अस्त का निर्दिष्ट समय जानने के लिये यहां
विस्तार पूर्वक गणित कहा गया ।
उदयास्त मयो प्रोक्तौ पूर्व सिद्धान्त सम्मतौ ।
दृक् सिद्धये पुनरुच्येते निजकल्प न योगतौ । ४४ ।
यहां तक प्राचीन आचार्यों की विधि से तारा और ग्रहों के उदय तथा अस्त
के विषय में कहा गया । अब अपनी कल्पना के अनुसार उनके उदयास्त के बारे
में कहता हूँ जो दृक् सिद्ध या वास्तव में दिखायी देगा ।