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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 308

ग्रहर्क्षोदयास्तसमय वर्णनम् २०९
अथ शुक्रेज्य सौम्यार्कि भौमास्तोदय भागकाः ।
प्रायशोऽङ्का (९) शिवा (११) विश्वे (१३)
तिथयो (१५) ऽद्रीन्दवः (१७) क्रमात् । २५ ।
तारा ग्रहों का कालांश इस प्रकार है-
शुक्र - ९ । वृहस्पति-११ । बुध-१३ । शनि-१५ । मंगल १७
चक्र चक्रार्द्ध निकट स्थितस्य शशि जन्मनः
मनवो (१४) भानवः (१२) स्पष्टा विश्वे (१३) मध्य तयोदिताः । २६ ।
चक्र या चक्रार्द्ध में कालांश इस प्रकार है-
बुध चक्र में -१४, बुध चक्रार्ध में-१२
शुक्र चक्र में -१० शुक्र चक्रार्द्ध में -८
ग्रहार्कयो भार्कयोर्वा कथितां साधिकेऽन्तरे ।
बिम्बोदृश्य स्ततो न्यूने ग्रहर्क्षाणामदर्शनम् । २७ ।
रवि से ग्रह या नक्षत्र का अन्तर कालांश से अधिक होने पर वह सदा दिखाई
देगा । रवि से ग्रह या नक्षत्र या अन्तर कालांश से कम होने पर नहीं दिखेगा ।
अस्त दृश्यस्त भागेभ्यः कालांशो नाधिकत्वयोः ।
क्रमादस्त मयोतीतो भावो चेति विचार्यताम् । २८ ।
इष्ट कालांश पठित कालांश से पश्चिम दिशा में कम होने पर उनका अस्त
हो चुका है, अधिक होने पर होने वाला है ऐसा समझना होगा ।
तेभ्य स्तुदयक् तैषा माधिक्य न्यून भावयोः
अंशानामुदयो यातो भविष्यन्निति चिन्त्यताम् । २९ ।
पूर्वदिशा में उदय इसके विपरीत क्रम से होगा । इष्ट कालांश पठित कालांश
से अधिक होने का अर्थ है कि उदय हो चुका है, कम होने का अर्थ है कि उदय
होने वाला है ।
चलांश संस्कृता र्कान्य ग्रहक्रान्तो दयासुभिः
उदयोऽस्त मये तद् वत् सषड् भोदय जा सुभं । ३० ।
अयनांश संस्कृत ग्रह और रवि जिस राशि में उनके उदयासु को उदय के
समय एवं सायन ग्रह और ६ राशियुक्त रवि के उदयासु अस्त के समय
ग्रहार्क भुक्ति गुणिते खाभ्र नगेन्दुभि (१८०) र्हते ।
स्यातां काल गतो तत्तद् विवरेणो दयास्तजाः । ३१ ।
रवि और ग्रह की दैनिक गति से गुणा कर (१८००) से भाग देंगे । फल उदय
या अस्त समय की काल गति होगी ।