सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभ ग्रह योग वर्णनम् २०३
दीखता है । इसको छाया पथ, वैश्वानर पथ या अभिजित् मार्ग कहा जाता है ।
इसकी स्थिति के सम्बन्ध में कुछ कहने की इच्छा है ।
क्रान्ति वृत्त मयनान्तयो स्पृशन्नुत्तरायणज गोल सन्धितः
उत्तरे खरस (६०) भाग दूर खस्त्वन्य गोल युगसंधि दक्षिणे । ८९ ।
यह छायापथ वृत्ताकार है । क्रान्ति वृत्त को यह सायन कर्क और मकर आदि
में स्पर्श कहता है । पुनः सायन मेष से ६०° अंश उत्तर तथा सायन तुला बिन्दु
से दक्षिण दिशा में-
वह्नि तर्क (६३) लवदूर गोऽदिते (७)
दक्षिणांश भिदवाग् दिशंगतः ।
मूल (१९) तोय (२०) भिदसौ तथा
भिजिद् वैष्णवा (२२) न्तर उदग् दिशंगतः । ९० ।
६३° तक इसकी सीमा है । पुनर्वसु, नक्षत्र के दक्षिण भाग को भेदकर यह
वृत्त दक्षिण दिशा में जाकर फिर मूल और पूर्वाषाढ़ नक्षत्र दोनों को भेद कर
अभिजित् तथा श्रवण के बीच तक जाता है । वहां से उत्तर की तरफ जाता है ।
याम्याय नान्त स्थलतो द्विफाल भाक्
ख नाग (८०) भागान्त मुदग् दिशिस्थितः
गोले विलिख्या कृति मस्य पश्यतां
यथा सुबोधन तथा भवेद्दिवि । ९१ ।
कर्क के आदि विन्दु से यह दो भागों में उत्तर की तरफ ८०° तक जाता है ।
छाया को गोल के ऊपर लिख कर आसानी से दिखाया जा सकता है, आकाश
में दिखाना सम्भव नहीं है (क्यों कि आधा ही दीखता है) ।
सम्यग् यन्त्र मिलद् विलोचन जनाः पश्यन्ति तारामयं
तन्मार्गं गुरुभं (८) च भास्वती शिखा नीलाभ रेखांकिताः
चन्द्रे तोया गिरिद्रुमान् बुध सितौ शीतांशुवत् खण्डितौ
शौरे बर्हिय गतं प्रकाश वलयं सूक्ष्म ग्रहो पग्रहान् । ९२ ।
(दूर वीक्षण) यन्त्र की सहायता से छाया पथ के तारा अच्छी प्रकार (अलग
अलग तारों को) देख सकते हैं । वे पुष्य नक्षत्र (वृहस्पति ?) सूर्य बिम्ब के काला
दाग, चन्द्रमण्डल में पानी, पर्वत और वृक्ष आदि भी देखते हैं । वह बुध और
शुक्र को भी चन्द्रमा के समान खण्डित होना देखते हैं । शनि के चारों तरफ
प्रकाश वलय तथा कई नये ग्रहों और उपग्रहों को भी इस यन्त्र से देखा जा सकता
है ।
पटा पटू रुचि कृत प्रकट हाटक श्री र्जगत्
कटाह घटना स्फुटोत्कट कटाक्ष पात क्रमः ।