सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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आधिनिकैरभियुक्ते निश्चित्योक्तं पृथक् च संस्थानम्
हत भुग् ब्रह्म हृदयोः प्रजापतये तत्पुन र्वच्मि । ३१ ।
आधुनिक प्रत्यक्ष दर्शी लोगों ने इन तारा का जो ध्रुव का कहा है वह मैं पुन
कहता हूँ ।
हृदभुक् ध्रुव, सपादाष्टाथी (५८।१५) खा साघ्रि पञ्च (५।१५)
सौम्यशरः षड् विकलास्त मानं ध्रुवः पुनर्ब्रह्म हृदयस्य । ३२ ।
हतभुक् का ध्रुव ५८° १५' शर ५° १५' उत्तर तथा बिम्ब मान (६) है । ब्रह्म
हृदय का ध्रुव -
अंगार्थाः (५६) सौम्य शर स्त्रिभुज (२३) लवान्नुपाः (१६)
स्तनुविकलाः सौम्य (५) याम्यगतो यो लुब्धक एतत् प्रजापतिम् । ३३ ।
५६° उत्तरशर २३° तथा बिम्बमान (१६) है । मृगशिरा नक्षत्र से दक्षिण के
तारा को लुब्धक कहा गया था उसे अब प्रजापति कहा जाता है ।
त्वाष्ट्र (१४) स्यापां वत्सः पञ्चलवान्ते वसत्युदक् भागे ।
आप्य वसु स्तत्सौम्य स्थूलः किञ्चित्ततोऽगां (६) शैः । ३४ ।
१४. चित्रा तारा के उत्तर ५° की दूरी पर अपांवत्स तारा है । इसके उत्तर ६°
की दूरी पर आप्य वसुतारा है, यह कुछ बढ़ा दीखता है । इसका अन्य नाम आप
है ।
ध्रुवोऽगस्तस्य पञ्चांक (९५) भागाः पञ्चाद्रयः (७५) शरः (५) ।
दक्षिणस्तद्द्भुवो वामं चलांशैः संस्कृतः स्फुटः । ३५ ।
अपां वत्स और आप्य वसु-दोनों का ध्रुव चित्रा के समान है । अपां वत्स
का उत्तर शर २° ५०' तथा आप्य वसु का उत्तरशर (८° ५०') है । अगस्त्य तारा
का ध्रुव ९५° और दक्षिण शर ७५° । इस अगस्त्य के ध्रुव का अयनांश संस्कार
(धन होने से जोड़ेगे, ऋण होने से घटायेंगे) करने पर यह स्फुट होगा ।
धृतयो (१८) विकलास्तस्य सूक्ष्ममण्डल विस्तृतिः ।
यमस्यैव द्विपक्षां (२२) शां ध्रुवो ऽगां गानि (६६) मार्गणः । ३६ ।
अगस्त्य का बिम्ब (१८") ध्रुव (२२°) शर (६६°) दक्षिण
याम्योऽष्टौ विकला बिम्बोऽगस्त्यब्द ध्रुव संस्कृतिः ।
राशित्रयमगस्त्यस्य ध्रुवः सौरोदितः पुरा । ३७ ।
तथा बिम्ब मान (८") है । सूर्य सिद्धान्त अगस्त्य तारा का ध्रुव ९०° कहा
है । (जब सत्ययुग में अल्प या १२१ वर्ष बाकी था) ।
सप्त नागां शक (८७) प्रोक्त सत्सिद्धान्त शिरोमणौ
भू शराक्षिकृता (४२५१) ब्देषु कलेभास्कर धीमता । ३७ ।