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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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भ ग्रह योग वर्णनम् १९३
देवमातु (७) पुनर्याम्यगा तारका सर्वतारा
धिका तद् विलिप्ता नखाः (२०)
तद् ध्रुव सप्त सप्तां (७७) शंका मार्गण,
खार्णवां (४०) शा निजापक्रमादक्षिणः । २५ ।
(अन्य कई तारों का ध्रुव, बिम्बमान तथा शर दिया जा रहा है । ७. पुनर्वसु
नक्षत्र के दक्षिण में सबसे उज्ज्वल एक तारा का बिम्ब कला (२०) ध्रुव (७७)
तथा ध्रुव प्रोतीय क्रान्ति (४०)
सूर्यसिद्धान्त वाक्यादियं तारका लुब्धका ख्यो सुनिश्चेति निश्चीयते ।
चेददित्या स्तदा याम्य गान्वा लघु स्तारका तत्समीपेऽपि निर्णीयताम् ।२६।
सूर्य सिद्धान्त के मत से इसे लुब्धकर तारा कहा जाता है । और एक छोटा
तारा भी (पुनर्वसु के दक्षिण में) दीखता है । जो लुब्धक नहीं है ।
केचिदातु मृगव्याधनामा मुनिः सोमभाद् (५)
याम्य गस्तद् ध्रुवोङ्गे षवः (५६)
याम्य वाणो रदाः ३२ स्वापमां दशकादिग् (१०)
विलिप्ताश्वतन्मण्डलस्या यतिः । २७ ।
कोई कोई आचार्य मृगव्याध नक्षत्र को मृगशिरा नक्षत्र के दक्षिण में मानते
हैं । इसका ध्रुव ५६ दक्षिणशर ३२ तथा बिम्ब मान १० है ।
तस्य चेशा (५) नभस्या (६) पिमध्य स्थितास्तारक
स्तिप्र ईषाभका ईल्वलाः ।
एक षष्टि (६१) ध्रुवः स्थूल भस्यार्द्ध युग्
वह्निपक्षाः (२३-१/२) शरोयाम्य आसा मतः । २८ ।
यह मृगव्याध और आर्द्रा नक्षत्र के बीच तीर के आकार के तीन तारा है ।
इनको ईल्वला कहा जाता है । इनके बीच का योगतारा है जिसका ध्रुव (६१)
तथा दक्षिण शर (२३।३० ) है ।
हुतभुग् ब्रह्म हृदय योः पक्षार्था (५२) शा ध्रुवश्व सौरोक्तः ।
प्रथमस्या ष्टौ (८) त्रिंश (३०) द्वितीय भस्यो त्तरेऽंशाः । २९ ।
हुतभुक् नक्षत्र का सूर्य सिद्धान्त के अनुसार ध्रुव (५२) और उत्तर शर (८)
है । ब्रह्महृदय का भी सूर्य सिद्धान्त के अनुसार ध्रुव (५२) तथा उत्तर शर (३०)
है ।
ब्रह्महृदय पूर्वस्यां पञ्चभिंरंशैः प्रजापति र्वसति
तस्योत्तर विक्षेपः कुञ्जर रामां (३८) शकोऽप्युदितः । ३० ।
ब्रह्महृदय से पूर्व ५° की दूरी पर प्रजापति नक्षत्र है । जिसका ध्रुव ५७° तथा
उत्तर शर ४८° है (सूर्य सिद्धान्त के अनुसार) ।

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