सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 290, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 290

भ ग्रह योग वर्णनम् १९१
के मुँह के समान, २. भरणी-त्रिकोण आकार ३ कृत्तिका अग्निशिखा के समान
तथा ४. रोहिणी-गाड़ी (शगड़) या बैल गाड़ी के समान ।
मार पाद (५) विद्रुम (६) कार्मुक )७)
कटिनीरजः (८) श्व पुच्छ (९) निभाः
लांगल (१०) भारसमामे (११) भार (१२)
कराभे (१३) च मुक्ताभा (१४) । १६ ।
५. मृगशिरा -बिल्ली के पैर या मृग के मुख के समान, ६. आर्द्रा मूंगा (
मणि) या बूंद की तरह ७. पुनर्वसु का आकार धनुष के समान ८. पुष्य का
आकार खल्ली (Chalk) के टुकड़े या तीर की तरह ९. अश्लेषा का आकार कुत्ते
की पूंछ के समान १०. मघा का आकार हल की तरह, ११. पूर्वा और उत्तरा
फाल्गुनी (१२) दोनों का आकार भार (कावरया लाठी पर दोनों तरफ लटकाये
हुए) के समान १३. हस्त का आकार हाथ के समान, १४. चित्रा का आकार मोती
के समान
माणिक्य (१५) तोरण (१६) फणि (१७)
कोड़रद (१८) किम्बु (१९) सर्प (२०) सदृश
तनवः सूर्या (२१) ग्निन बिम्बं सायक (२२)
मुरज (२३) वितान (२४) प्रतीकाशाः (१७) ।
१५. स्वाती का आकार माणिक्य, या मूंगा १६. विशाखा तोरण ( छप्पर )
की तरह १७. अनुराधा सांप के फण के समान, १८. ज्येष्ठा-सूअर के दांत की
तरह, १९. मूल-शंख के समान, (या सिंह की पूंछ की तरह) २०. पूर्वाषाढ़ और
२१ उत्तराषाढ दोनों सूप की तरह (या हाथी दांत की तरह) ०.० अभिजित् अग्नि
बिम्ब की तरह या त्रिकोण २२. श्रवण शर (तीर) की तरह (या वामन) २३.
धनिष्ठा- नगाड़ा की तरह, २४. शतभिष् तोरण की तरह ,
भारनिभा (२५ भारसमा (२६) मीनाभा (२७) चेतिसम्मताद् भढ़वः ।
काश्चित् कैश्चित् प्रोक्ता भिन्ना कृतयः स्वशास्त्रेषु । १८ ।
२५ पूर्व भाद्रपद और २६. उत्तर भाद्रपद भार (डण्डे के दोनों तरफ लटके)
या मञ्च के समान २७ रेवती का आकार मछली या नगाड़ा की तरह दीखता
है । नक्षत्रों का आकार समस्तो के मत से समान नहीं है ।
अश्वि (१) चन्द्र (५) भगे (११) न्द्राग्नि (१६) तोय २०) विश्वा (२१)
जपादका (२५) अहिर्बुध्नस्यो (२६) तरस्थायोगताराध्रुवां शगा । १९ ।
किस नक्षत्र का योगतारा कहां स्थित है यह कहा जाता है । १. अश्विनी ५.
मृगशिरा, ११. पूर्वाफाल्गुनी १६ विशाखा, २० पूर्वाषाढ, २१. उत्तराषाढ़, २५.
पूर्वभाद्रपद तथा २६. उत्तर भाद्रपद इन नक्षत्रों का योग तारा नक्षत्र के उत्तर दिशा
में है ।